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त्रि॒व॒न्धु॒रेण॑ त्रि॒वृता॒ रथे॒ना या॑तमश्विना । मध्व॒: सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
trivandhureṇa trivṛtā rathenā yātam aśvinā | madhvaḥ somasya pītaye ||
पद पाठ
त्रि॒ऽव॒न्धु॒रेण॑ । त्रि॒ऽवृता॑ । रथे॑न । आ । या॒त॒म् । अ॒श्वि॒ना॒ । मध्वः॑ । सोम॑स्य । पी॒तये॑ ॥ ८.८५.८
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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:85» मन्त्र:8
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:8» मन्त्र:3
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:8
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'त्रिवन्धुर त्रिवृत्' रथ
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अश्विना) = प्राणापानो! आप रथेन इस शरीररथ से हमें (आयातम्) = प्राप्त होवो, जो शरीररथ ('त्रिबन्धुरेण') = सुन्दर 'इन्द्रियों, मन व बुद्धि' वाला है। अन्नमयकोश शरीररथ का ढाँचा है, इस रथ में प्राणमय [प्राणा: वाव इन्द्रियाणि] मनोमय व विज्ञानमयकोश रूप तीन सुन्दर आसन [Seat] हैं। [वन्धुर Beautiful ] । यह रथ (त्रिवृता) = [त्रिषु वर्तते] 'ज्ञान, कर्म व उपासना' रूप तीनों मार्गों का आक्रमण करता है। [२] हे प्राणापानो! आप इस त्रिवृत रथ से वासनाओं को कुचलते हुए (मध्वः सोमस्य पीतये) = जीवन को मधुर बनानेवाले सोम के पान के लिये होओ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्राणसाधना से 'इन्द्रियाँ, मन व बुद्धि' तीनों की निर्दोषता व सुन्दरता प्राप्त होती है सोमरक्षण द्वारा हम ‘ज्ञान, कर्म व उपासना' के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं- ज्ञानपूर्वक किये जानेवाले कर्मों के द्वारा हम प्रभु के उपासक बनते हैं।
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Ashvins, come by a three stage chariot powered by a three turbine motive force to promote the honey sweets of new knowledge and celebrate the soma joy of the new achievement.
