शृ॒णु॒तं ज॑रि॒तुर्हवं॒ कृष्ण॑स्य स्तुव॒तो न॑रा । मध्व॒: सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
śṛṇutaṁ jaritur havaṁ kṛṣṇasya stuvato narā | madhvaḥ somasya pītaye ||
पद पाठ
शृ॒णु॒तम् । ज॒रि॒तुः । हव॑म् । कृष्ण॑स्य । स्तु॒व॒तः । न॒रा॒ । मध्वः॑ । सोम॑स्य । पी॒तये॑ ॥ ८.८५.४
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:85» मन्त्र:4
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:7» मन्त्र:4
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:4
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
नरा [अश्विना]
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (नरा) = हमें उन्नतिपथ पर ले चलनेवाले प्राणापानो! आप (जरितुः) = स्तवन करनेवाले इस (कृष्णस्य) = वासनाओं का विलेखन करनेवाले उपासक की (इवम्) = प्रकार को (शृणुतम्) = सुनो। [२] आप ही (स्तुवतः) = स्तुति करनेवाले इस स्तोता के (मध्वः) = जीवन को मधुर बनानेवाले (सोमस्य) = सोम के पीतये पान के लिये होते हो। आप ही इसके सोम का रक्षण करते हो।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्राणापान ही स्तोता के सोम का रक्षण करते हुए उसके जीवन को मधुर बनाते हैं।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Listen to the call of the celebrant worshipper who draws your attention to the soma joys and beauties of life. Come, taste, protect and promote the honey sweet efforts of the creators, O brave leaders of the people.
