वांछित मन्त्र चुनें
देवता: अश्विनौ ऋषि: कृष्णः छन्द: गायत्री स्वर: षड्जः

अ॒यं वां॒ कृष्णो॑ अश्विना॒ हव॑ते वाजिनीवसू । मध्व॒: सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ayaṁ vāṁ kṛṣṇo aśvinā havate vājinīvasū | madhvaḥ somasya pītaye ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अ॒यम् । वा॒म् । कृष्णः॑ । अ॒श्वि॒ना॒ । हव॑ते । वा॒जि॒नी॒व॒सू॒ इति॑ वाजिनीऽवसू । मध्वः॑ । सोम॑स्य । पी॒तये॑ ॥ ८.८५.३

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:85» मन्त्र:3 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:7» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:3


0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

कृष्ण

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (वाजिनीवसू) = शक्तिरूप धनोंवाले (अश्विना) = प्राणापानो! (अयम्) = यह (कृष्णः) = वासनाओं का विलेखन [कृष्] करनेवाला आपका उपासक (वां हवते) = आपको पुकारता है। [२] आप इस कृष्ण के जीवन में (मध्वः) = जीवन को मधुर बनानेवाले इस (सोमस्य) = सोम के वीर्य के पीतये रक्षण के लिये होओ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्राणापान का उपासक 'कृष्ण' होता है यह वासनाओं का विलेखन (अवदारण) करता है और सोम का रक्षण करता है।
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - This ardent celebrant invokes you and draws your attention, Ashvins, winners of wealth and victories, to come, enjoy, protect and promote the soma joys of life for peace and progress.