क्षेति॒ क्षेमे॑भिः सा॒धुभि॒र्नकि॒र्यं घ्नन्ति॒ हन्ति॒ यः । अग्ने॑ सु॒वीर॑ एधते ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
kṣeti kṣemebhiḥ sādhubhir nakir yaṁ ghnanti hanti yaḥ | agne suvīra edhate ||
पद पाठ
क्षेति॑ । क्षेमे॑भिः । सा॒धुऽभिः॑ । नकिः॑ । यम् । घ्नन्ति॑ । हन्ति॑ । यः । अग्ने॑ । सु॒ऽवीरः॑ । ए॒ध॒ते॒ ॥ ८.८४.९
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:84» मन्त्र:9
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:6» मन्त्र:4
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:9
0 बार पढ़ा गया
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
सुवीरः एधते
पदार्थान्वयभाषाः - [१] गतमन्त्र के अनुसार प्रभु की उपासना करनेवाला व्यक्ति (क्षेमेभिः) = कल्याणकर (साधुभिः) = उत्तम कार्यों से (क्षेति) = घर में निवास करता है, अर्थात् सदा उत्तम कल्याणकर कर्मों को करता है। यह उपासक वह होता है (यम्) = जिसको (नकिः ध्नन्ति) = काम-क्रोध आदि शत्रु मार नहीं सकते; प्रत्युत (यः हन्तिः) = जो इन शत्रुओं को मारनेवाला होता है। [२] हे (अग्ने) = अग्रेणी प्रभो! आपका यह उपासक (सुवीरः एधते) = उत्तम वीर बनकर वृद्धि को प्राप्त करता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-उपासक [क] उत्तम कार्यों में प्रवृत्त होता है, [ख] काम-क्रोध आदि का शिकार नहीं होता, [ग] इन काम-क्रोध आदि को नष्ट करता है, [घ] उत्तम वीर बनकर वृद्धि को प्राप्त करता है। यह शत्रुओं का धर्षण करनेवाला विलेखन करनेवाला उपासक 'कृष्ण' बनता है यह आंगिरस तो बनेगा ही अंग-प्रत्यंग में रसवाला शक्तिशाली। यह शरीर में सोम के रक्षण के लिये अश्विना [प्राणापान] का आह्वान करता है-
0 बार पढ़ा गया
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Agni, O lord self-refulgent, the man who lives at peace in his home with the wealth of his peaceable protective good actions and wards off evil, no evil thoughts assail, such a man prospers, brave and blest with holy wealth and good progeny.
