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देवता: अग्निः ऋषि: उशना काव्यः छन्द: गायत्री स्वर: षड्जः
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तं म॑र्जयन्त सु॒क्रतुं॑ पुरो॒यावा॑नमा॒जिषु॑ । स्वेषु॒ क्षये॑षु वा॒जिन॑म् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tam marjayanta sukratum puroyāvānam ājiṣu | sveṣu kṣayeṣu vājinam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

तम् । म॒र्ज॒य॒न्त॒ । सु॒ऽक्रतु॑म् । पु॒रः॒ऽयावा॑नम् । आ॒जिषु॑ । स्वेषु॑ । क्षये॑षु । वा॒जिन॑म् ॥ ८.८४.८

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:84» मन्त्र:8 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:6» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:8


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

तं मर्जयन्त [उसी की उपासना]

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (ते) = वे उस प्रभु को ही (स्वेषु क्षयेषु) = अपने निवासस्थानों में- गृहों में व हृदयों में (मर्जयन्त) = अलंकृत करते हैं व उपासित करते हैं। घरों में मिलकर प्रभु का उपासन घरवालों को पवित्र जीवनवाला बनाता है। हृदयदेश में प्रभु का ध्यान हमें प्रभु के सान्निध्य में 'शक्ति, पवित्रता व ज्ञान' से दीप्त करता है। [२] उस प्रभु का ध्यान करते हैं जो (सुक्रतुम्) = शोभन कर्मों व प्रज्ञानवाले हैं- उपासक को भी वे शुभ कर्मों व प्रज्ञानोंवाला बनाते हैं। (आजिषु पुरः यावानम्) = संग्रामों में आगे ले चलनेवाले वे प्रभु हैं। प्रभु ही हमें काम-क्रोध आदि से संग्रामों में विजयी बनाते हैं। (वाजिनम्) = वे प्रभु शक्तिशाली हैं- उपासक के जीवन में शक्ति का संचार करते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम अपने घरों में मिलकर प्रभु का उपासक करें - हृदयदेश में प्रभु क ध्यान करें। प्रभु हमें शोभन कर्मों व प्रज्ञानवाला बनायेंगे वे हमें काम-क्रोध आदि से संग्राम में विजय करेंगे और शक्तिशाली बनायेंगे ।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - In their battles of life and in their homes, people adore and glorify Agni, that high priest of divine action, first and original initiator, leader and guide and mighty potent creator of the universe.