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देवता: अग्निः ऋषि: उशना काव्यः छन्द: गायत्री स्वर: षड्जः

कस्य॑ नू॒नं परी॑णसो॒ धियो॑ जिन्वसि दम्पते । गोषा॑ता॒ यस्य॑ ते॒ गिर॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

kasya nūnam parīṇaso dhiyo jinvasi dampate | goṣātā yasya te giraḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

कस्य॑ । नू॒नम् । परी॑णसः । धियः॑ । जि॒न्व॒सि॒ । द॒म्ऽप॒ते॒ । गोऽसा॑ता । यस्य॑ । ते॒ । गिरः॑ ॥ ८.८४.७

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:84» मन्त्र:7 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:6» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:7


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

गोमाता यस्म ते गिरः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (दम्पते) = गृहपते ! हम सबके गृहों के रक्षक प्रभो ! आप (नूनम्) = निश्चय से (कस्य) = आनन्द के - आनन्द को प्राप्त करानेवाले (परीणसः) = बहुत (धिया) = ज्ञानपूर्वक किये जानेवाले कर्मों को (जिन्वसि) = [प्रीणयसि] प्रीणित करते हैं-इन कर्मों को हमें प्राप्त कराते हैं। [२] (यस्य) = जिस (ते) = आपकी (गिरः) = स्तुतियाँ (गोषाता) = हमारे साथ ज्ञान का सम्भजन करनेवाली है। आप स्तोता के लिये ज्ञान को प्राप्त कराते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु उपासक को आनन्द को प्राप्त करानेवाले बुद्धिपूर्वक किये जानेवाले कर्मों में प्रेरित करते हैं और उसके ज्ञान को बढ़ाते हैं।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O lord protector of the world, as a happy home and shelter for the people, whose sincere and abundant prayers do you accept and fulfil? His whose prayers to you are enlightened and inspired by knowledge, wisdom and sincere awareness of divinity.