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अधा॒ त्वं हि न॒स्करो॒ विश्वा॑ अ॒स्मभ्यं॑ सुक्षि॒तीः । वाज॑द्रविणसो॒ गिर॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

adhā tvaṁ hi nas karo viśvā asmabhyaṁ sukṣitīḥ | vājadraviṇaso giraḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अध॑ । त्वम् । हि । नः॒ । करः॑ । विश्वाः॑ । अ॒स्मभ्य॑म् । सु॒ऽक्षि॒तीः । वाज॑ऽद्रविणसः । गिरः॑ ॥ ८.८४.६

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:84» मन्त्र:6 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:6» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:6


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

वाजद्रविणसो गिरः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] गतमन्त्र के अनुसार हम प्रभु का यज्ञों व नमन के द्वारा उपासन करें और हे प्रभो ! (त्वम्) = आप (अधा) = अब (नः) = हमें उन्नत (करः) = करनेवाले होइये । आप ही हमारे जीवनों को उत्कृष्ट बनाइये। आप (अस्मभ्यम्) = हमारे लिये (विश्वाः) = सब (सुक्षितीः) = उत्तम निवासों व गतियों को करिये। [२] इसी उद्देश्य से आप हमारे लिये (वाजद्रविणसः) = शक्तिरूप धनवाली इन (गिरः) = ज्ञान की वाणियों को भी करिये। हम शक्तियुक्त ज्ञान को प्राप्त करके अपने निवासों व गमनों को उत्कृष्ट बनायें।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु ही उपासकों के जीवनों को उत्कृष्ट बनाते हैं। प्रभु ही हमारे निवास व गमन को उत्तम बनाने के लिये हमें शक्तियुक्त ज्ञान प्राप्त कराते हैं।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - And you alone will provide happy homes and peaceful establishment for all our people and bless us with vitality, power, wealth and victory in response to our prayer.