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देवता: अग्निः ऋषि: उशना काव्यः छन्द: गायत्री स्वर: षड्जः

दाशे॑म॒ कस्य॒ मन॑सा य॒ज्ञस्य॑ सहसो यहो । कदु॑ वोच इ॒दं नम॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

dāśema kasya manasā yajñasya sahaso yaho | kad u voca idaṁ namaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

दाशे॑म । कस्य॑ । मन॑सा । य॒ज्ञस्य॑ । स॒ह॒सः॒ । य॒हो॒ इति॑ । कत् । ऊँ॒ इति॑ । वो॒चे॒ । इ॒दम् । नमः॑ ॥ ८.८४.५

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:84» मन्त्र:5 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:5» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:5


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

यज्ञ+नमन

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सहसो यहो) = बल के पुत्र शक्ति के पुञ्ज प्रभो ! हम (कस्य यज्ञस्य) = आनन्दप्रद यज्ञ के मनसा मन से, अर्थात् यज्ञ की प्रवृत्तिवाले मन से दाशमे आपके प्रति अपने को देनेवाले बनें। यज्ञों के द्वारा आपका उपासन करें। 'यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवाः' । [२] हे प्रभो ! हम (उ) = निश्चय से (कत्) = [कं तनोति] आनन्द का विस्तार करनेवाले (इदं नमः) = इस नमस्कार वचन को वोचे बोलें।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम यज्ञों व नमन के द्वारा प्रभु का उपासन करें।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Agni, to which mighty, potent, adorable power other than you, shall we offer our sincere homage, when and where present these words of prayer?