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त्वं य॑विष्ठ दा॒शुषो॒ नॄँ: पा॑हि शृणु॒धी गिर॑: । रक्षा॑ तो॒कमु॒त त्मना॑ ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tvaṁ yaviṣṭha dāśuṣo nṝm̐ḥ pāhi śṛṇudhī giraḥ | rakṣā tokam uta tmanā ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

त्वम् । य॒वि॒ष्ठ॒ । दा॒शुषः॑ । नॄन् । पा॒हि॒ । शृ॒णु॒धि । गिरः॑ । रक्ष॑ । तो॒कम् । उ॒त । त्मना॑ ॥ ८.८४.३

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:84» मन्त्र:3 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:5» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:3


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

दाश्वान् के रक्षक प्रभु

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (यविष्ठ) = बुराइयों को हमारे से अधिक से अधिक पृथक् करनेवाले व अच्छाइयों को हमारे से मिलानेवाले प्रभो ! (त्वम्) = आप (दाशुषः नॄन्) = आपके प्रति अपना अर्पण करनेवाले मनुष्यों को (पाहि) = रक्षित करिये। आप (गिरः) = हमारी इन प्रार्थना वाणियों को (शृयुधि) = अवश्य सुनिये। आपने ही तो हमारा रक्षण करना है हम आपके ही शरणागत हैं। [२] (उत) = और आप (त्मना तोकं) = रक्षा-स्वयं ही हम सन्तानों का रक्षण कीजिये। हमारा व हमारे सन्तानों का आपने ही रक्षण करना है । पुत्र कभी पिता से रक्षण की प्रार्थना थोड़े ही किया करता है? पिता स्वयं ही पुत्र का रक्षण करते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्रभु के प्रति अपना अर्पण करें। प्रभु ही हमारा व हमारे सन्तानों करेंगे।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O lord eternal, ever youthful beyond age, pray protect and promote the families of the generous people, listen to their voices of prayer and, by all your will and power, protect and promote the children and grand children of humanity.