क॒विमि॑व॒ प्रचे॑तसं॒ यं दे॒वासो॒ अध॑ द्वि॒ता । नि मर्त्ये॑ष्वाद॒धुः ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
kavim iva pracetasaṁ yaṁ devāso adha dvitā | ni martyeṣv ādadhuḥ ||
पद पाठ
क॒विम्ऽइ॑व । प्रऽचे॑तसम् । यम् । दे॒वासः॑ । अध॑ । द्वि॒ता । नि । मर्त्ये॑षु । आ॒ऽद॒धुः ॥ ८.८४.२
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:84» मन्त्र:2
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:5» मन्त्र:2
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:2
0 बार पढ़ा गया
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
कविम् इव प्रचेतसम्
पदार्थान्वयभाषाः - [१] उस प्रभु का हम स्तवन करते हैं (यम्) = जिसको (देवासः) = देववृत्ति के पुरुष द्विता ज्ञान व शक्ति विस्तार के द्वारा [द्वौ तनोति] (मर्त्येषु) = अपने इन मरणधर्मा शरीरों में (नि आदधुः) = निश्चय से धारण करते हैं । [२] उस प्रभु को हम स्तुत करते हैं जो (कविं इव) = क्रान्तदर्शी की तरह (प्रचेतस) = प्रकृष्ट ज्ञानवाले हैं। वे प्रभु ही हमें भी प्रकृष्ट चेतनावाला करते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-वे प्रभु क्रान्तदर्शी होते हुए उपासकों को प्रकृष्ट ज्ञान प्राप्त करानेवाले हैं। हम भी देव बनकर ज्ञान व शक्ति के विस्तार के द्वारा प्रभु को अपने में धारण करें।
0 बार पढ़ा गया
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - I adore Agni whom the divinities established among mortals as the visionary poet and the spirit of enlightenment and awareness, as intelligence and mind, as will and passion, as perception and volition, as male and female and as the yajna fire and the vital heat of the body system, the two ways in which divine vitality expresses itself.
