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प्र भ्रा॑तृ॒त्वं सु॑दान॒वोऽध॑ द्वि॒ता स॑मा॒न्या । मा॒तुर्गर्भे॑ भरामहे ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

pra bhrātṛtvaṁ sudānavo dha dvitā samānyā | mātur garbhe bharāmahe ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

प्र । भ्रा॒तृ॒त्ऽवम् । सु॒ऽदा॒न॒वः॒ । अध॑ । द्वि॒ता । स॒मा॒न्या । मा॒तुः । गर्भे॑ । भ॒रा॒म॒हे॒ ॥ ८.८३.८

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:83» मन्त्र:8 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:4» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:8


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

मातुः गर्भे

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सुदानवः) = सम्यक् बुराइयों का खण्डन करनेवाले देवो ! हम (अध) = अब (मातुः गर्भे) = ज्ञान के द्वारा हमारा निर्माण करनेवाले आचार्य के गर्भ में [आचार्य उपनयमानो ब्रह्मचारिणं कृणुते गर्भमन्तः] (समान्या हिता) = [सम् आनयति, द्यौ तनोति] उत्तम जीवन को देनेवाले ज्ञान व शक्ति के विस्तार से आपके साथ (भ्रातृत्वम्) = बन्धुत्व को (प्रभरामहे) = अपने में परिपुष्ट करते हैं। [२] आचार्य ब्रह्मचारी का उपनयन करता हुआ उसे गर्भ में धारण करता है। इस प्रकार आचार्य माता का स्थान ग्रहण करता है यहाँ विद्यार्थी अपने जीवन में शक्ति व ज्ञान का विस्तार करता हुआ जीवन को उत्तम बनाता है। इस प्रकार हम उत्तम जीवनवाले बनकर देवों के साथ अपने बन्धुत्व को पुष्ट करते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- आचार्य के गर्भ में रहकर हम शक्ति व ज्ञान का विस्तार करें। इस प्रकार हम भी देवों के साथ बन्धुत्ववाले हों।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Brotherliness and similarity as well as duality and dissimilarity, O generous Vishvedevas, we acquire in mother Prakrti’s womb and bear from there.