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यं ते॑ श्ये॒नः प॒दाभ॑रत्ति॒रो रजां॒स्यस्पृ॑तम् । पिबेद॑स्य॒ त्वमी॑शिषे ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yaṁ te śyenaḥ padābharat tiro rajāṁsy aspṛtam | pibed asya tvam īśiṣe ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यम् । ते॒ । श्ये॒नः । प॒दा । अभ॑रत् । ति॒रः । रजां॑सि । अस्पृ॑तम् । पिब॑ । इत् । अ॒स्य॒ । त्वम् । ई॒शि॒षे॒ ॥ ८.८२.९

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:82» मन्त्र:9 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:2» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:9


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

श्येनः पदा आभरत्

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्रभो ! (यम्) = जिस (ते) = आपके सोम को (श्येनः) = शंसनीय गतिवाला (पदा आभरत्) = क्रियाशीलता के द्वारा अपने में धारण करता है। यह श्येन (अस्पृतम्) = काम-क्रोध आदि व रोगरूप शत्रुओं से अस्पृष्ट सोम को (रजांसि तिरः) = राजस भावों को तिरस्कृत करके अपने में धारण करता है वासनाएँ ही सोमरक्षण में विघातक होती हैं। [२] हे प्रभो! आप ही (अस्य) = इस सोम का (पिबा) = पान करिये। (त्वं ईशिषे) = आप ही इसके पान के लिये ईश हैं। प्रभुस्मरण ही हमें वासनाओं के आक्रमण से बचाकर सोमपान के योग्य बनाता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- गतिशील पुरुष ही राजसभावों से ऊपर उठकर सोम का रक्षण कर पाता है। प्रभु का उपासन हमें राजसभावों के आक्रमण से बचाकर सोमरक्षण के योग्य बनाता है। अगले सूक्त का ऋषि भी 'कुसीदी काण्व' ही है। यह प्रार्थना करता है कि-
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Of the nectar of ecstasy which the mighty sage and scholar distilled by flights of spiritual imagination from heaven and brought in by the rays of light across the spaces, drink and enjoy since now you alone rule over the sublimity and power of this nectar.