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य इ॑न्द्र चम॒सेष्वा सोम॑श्च॒मूषु॑ ते सु॒तः । पिबेद॑स्य॒ त्वमी॑शिषे ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ya indra camaseṣv ā somaś camūṣu te sutaḥ | pibed asya tvam īśiṣe ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यः । इ॒न्द्र॒ । च॒म॒सेषु॑ । आ । सोमः॑ । च॒मूषु॑ । ते॒ । सु॒तः । पिब॑ । इत् । अ॒स्य॒ । त्वम् । ई॒शि॒षे॒ ॥ ८.८२.७

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:82» मन्त्र:7 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:2» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:7


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

चमूषु सुतः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो ! (यः सोमः) = जो सोम है, वह (ते) = तेरे द्वारा (चमसेषु) = इन शरीररूप पात्रों में (चमूषु) = [चम्वौ द्यावापृथिव्यौ नि० ३.३०] द्यावापृथिवी के निमित्त मस्तिष्क व शरीर के निमित्त (सुतः) = उत्पन्न किया गया है। यह सोम शरीर को शक्तिशाली बनाता है, तो मस्तिष्क को ज्ञानदीप्त करता है। [२] हे प्रभो! आप (अस्य) = इस सोम का (पिबा इत्) = पान करिये ही । (त्वं ईशिणे) = आप ही इस सोमपान के लिये ईश हैं। वस्तुतः प्रभु का उपासन ही वासनाविनाश द्वारा हमें सोम के पान के योग्य बनाता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभुस्मरण द्वारा हम वासना को विनष्ट करके सोम को शरीर में सुरक्षित रखें। सुरक्षित सोम मस्तिष्क को ज्ञानदीप्त बनाता है, तो शरीर को सबल करता है।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, of the soma which is distilled and poured in the cups and ladles of spiritual yajna for you, drink to your heart’s desire since you yourself rule over the ecstasy of the nectar.