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इन्द्र॑ श्रु॒धि सु मे॒ हव॑म॒स्मे सु॒तस्य॒ गोम॑तः । वि पी॒तिं तृ॒प्तिम॑श्नुहि ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

indra śrudhi su me havam asme sutasya gomataḥ | vi pītiṁ tṛptim aśnuhi ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

इन्द्र॑ । श्रु॒धि । सु । मे॒ । हव॑म् । अ॒स्मे इति॑ । सु॒तस्य॑ । गोऽम॑तः । वि । पी॒तिम् । तृ॒प्तिम् । अ॒श्नु॒हि॒ ॥ ८.८२.६

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:82» मन्त्र:6 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:2» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:6


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

सोम की पीति व तृप्ति

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो ! (मे हवम्) = मेरी प्रार्थना को (सु श्रुधि) = सम्यक् सुनिये। आप (अस्मे) = हमारे हित के लिये (सुतस्य) = उत्पन्न किये गये (गोमतः) = प्रशस्त ज्ञान की वाणियोंवाले सोम के (प्रीतिम्) = पान को व (तृप्तिम्) = तृप्ति को (वि अश्नुहि) = व्याप्त करिये। [२] आपकी कृपा से सोम मेरे अन्दर सुरक्षित हो। यह सोम मुझे तृप्ति का अनुभव कराये।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्रभु का आराधन करते हुए सोम को शरीर में सुरक्षित कर सकें और तृप्ति का अनुभव करें।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, listen to my call, come and have a drink of our distilled soma seasoned with milk and ecstatic power to your total fulfilment of the heart and soul.