तुभ्या॒यमद्रि॑भिः सु॒तो गोभि॑: श्री॒तो मदा॑य॒ कम् । प्र सोम॑ इन्द्र हूयते ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
tubhyāyam adribhiḥ suto gobhiḥ śrīto madāya kam | pra soma indra hūyate ||
पद पाठ
तुभ्य॑ । अ॒यम् । अद्रि॑ऽभिः । सु॒तः । गोभिः॑ । श्री॒तः । मदा॑य । कम् । प्र । सोमः॑ । इ॒न्द्र॒ । हू॒य॒ते॒ ॥ ८.८२.५
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:82» मन्त्र:5
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:1» मन्त्र:5
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:5
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
गोभिः श्रीतः [सोमः]
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो ! (अयं सोमः) = यह सोम [वीर्यकण] (तुभ्यम्) = आपकी प्राप्ति के लिये (अद्रिभिः) = उपासकों के द्वारा (सुतः) = उत्पन्न किया जाता है। इसके रक्षण से ही तो प्रभु की प्राप्ति होती है। (गोभिः श्रीतः) = ज्ञान की वाणियों के द्वारा इसका परिपाक होता है। यह (कम्) = निश्चय से (मदाय) = हमारे उल्लास के लिये होता है। [२] इस कारण से ही यह (सोमः) = सोम (प्र हूयते) = ज्ञानाग्नि में आहुत किया जाता है। ज्ञानाग्नि में आहुत सोम ज्ञानाग्नि को दीप्त करता है। दीप्त ज्ञानाग्नि प्रभुदर्शन का साधक बनती है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सुरक्षित सोम प्रभुप्राप्ति का साधन बनता है। स्वाध्याय द्वारा ज्ञान प्राप्ति में लगे रहना सोमरक्षण का साधन बनता है। सुरक्षित सोम आनन्द का जनक होता है।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Indra, to you is offered this soma, soothing and exhilarating it is, distilled by celebrated admirers and seasoned with the spirit of light and power of divine ecstasy, especially for you.
