स॒द्यो॒जुव॑स्ते॒ वाजा॑ अ॒स्मभ्यं॑ वि॒श्वश्च॑न्द्राः । वशै॑श्च म॒क्षू ज॑रन्ते ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
sadyojuvas te vājā asmabhyaṁ viśvaścandrāḥ | vaśaiś ca makṣū jarante ||
पद पाठ
स॒द्यः॒ऽजुवः॑ । ते॒ । वाजाः॑ । अ॒स्मभ्य॑म् । वि॒श्वऽच॑न्द्राः । वशैः॑ । च॒ । म॒क्षु । ज॒र॒न्ते॒ ॥ ८.८१.९
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:81» मन्त्र:9
| अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:38» मन्त्र:4
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:9
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे भगवन् ! (दक्षिणेन) दक्षिण हस्त से (नः) हम लोगों को (आ+भर) धनधान्य से पूर्ण कर (सव्येन) बायें हाथ से (अभि+प्रमृश) चारों ओर रक्षा कर, हे इन्द्र (नः) हम लोगों को (वसोः) धन और वास से (मा+निर्भाक्) मत अलग कर ॥६॥
भावार्थभाषाः - यहाँ पुरुषत्व का आरोप करके वर्णन किया गया है, इसलिये दक्षिण और सव्य शब्द का प्रयोग है। ईश्वर हम लोगों का चारों ओर से भरण-पोषण कर रहा है और विस्तृत धन और वास दे रहा है, अतः वही मनुष्यों का पूज्य देव है ॥६॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
आह्लादक बल
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्रभो! (ते वाजाः) = आप के बल (अस्मभ्यं सद्योजुवः) = शीघ्र ही हमें सन्मार्ग पर प्रेरित करनेवाले होते हैं (विश्वश्चन्द्राः) = ये बल सब के लिये आह्लाद का कारण बनते हैं। [२] ये बल (वशैः) = शत्रुओं को वशीभूत करने के हेतुओं से (मक्षू) = शीघ्र ही (जरन्ते) = आपका स्तवन करते हैं। आपका स्तवन करते हुए हम बलों के द्वारा शत्रुओं को अभिभूत करनेवाले हों।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-प्रभु के बल हमें सत्कर्त्तव्यों में प्रेरित करें ये सब के लिये आह्लादक हों और शत्रुओं को अभिभूत करनेवाले हों। कुसीदी काण्व ही प्रभु से प्रार्थना करता है-
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे भगवन् ! दक्षिणेन हस्ते। नः=अस्मान्। आ+भर=पोषय सव्येन च अभिप्रमृश। अभितः प्ररक्ष। हे इन्द्र। नः=अस्मान्। वसोः=धनात्। मा+निर्भाक्=निर्भाक्षीः ॥६॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Your wealth, honours and victories instantly rising, constantly moving and effective are all radiant over the world, they come to us without delay according to your will and order and celebrate and glorify you.
