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आ नो॑ भर॒ दक्षि॑णेना॒भि स॒व्येन॒ प्र मृ॑श । इन्द्र॒ मा नो॒ वसो॒र्निर्भा॑क् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ā no bhara dakṣiṇenābhi savyena pra mṛśa | indra mā no vasor nir bhāk ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

आ । नः॒ । भ॒र॒ । दक्षि॑णेन । अ॒भि । स॒व्येन । प्र । मृ॒श॒ । इन्द्र॑ । मा । नः॒ । वसोः॑ । निः । भा॒क् ॥ ८.८१.६

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:81» मन्त्र:6 | अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:38» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:6


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शिव शंकर शर्मा

उसका महत्त्व दिखलाते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (शूर) हे महावीर सर्वशक्ते ईश ! (दित्सन्तम्) इस जगत् को दान देते हुए (त्वा) तुझको (देवाः+नहि+वारयन्ते) देवगण निवारण नहीं कर सकते (न+मर्तासः) मनुष्यगण भी तुझको निवारण नहीं कर सकते। (न) जैसे (भीमम्) भयानक (गाम्) साँड को रोक नहीं सकते ॥३॥
भावार्थभाषाः - वह ईश्वर सबसे बलवान् है और अपने कार्य्य में परम स्वतन्त्र है, अतः वहाँ किसी की शक्ति काम नहीं करती ॥३॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

उत्साहित होकर वसु को प्राप्त करना

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो ! (ता) = हमारे लिये (दक्षिणेन) = दाहिने हाथ से (आभर) = ऐश्वर्य को प्राप्त कराइये । (स्वयेन अभि प्रमृश) = बाएँ हाथ से हमें थपकी देकर उत्साहित करिये [मृक्ष्] उत्साहित होकर हम धनार्जन के लिये उद्योगवाले हों। [२] हे प्रभो! हमें (वसोः) = निवास के लिये आवश्यक धन से (मा निर्भाक्) = वञ्चित मत करिये। वसु में हमें भागी बनाइये।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हे प्रभो! आप हमें उत्साहित करिये और पुरुषार्थ के द्वारा धनार्जन में समर्थ करिये।
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शिव शंकर शर्मा

तस्य महत्त्वं दर्शयति।

पदार्थान्वयभाषाः - हे शूर ! दित्सन्तम्=दातुमिच्छन्तम्। त्वा देवाः। नहि वारयन्ते। न च मर्तासो मनुष्याः। न=यथा। भीमं गां वृषभं न वारयन्ते ॥३॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, bear and bring and bless us with wealth, power, honour and protection both by right and by left hand, and never deprive us of this honour and excellence.