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एतो॒ न्विन्द्रं॒ स्तवा॒मेशा॑नं॒ वस्व॑: स्व॒राज॑म् । न राध॑सा मर्धिषन्नः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

eto nv indraṁ stavāmeśānaṁ vasvaḥ svarājam | na rādhasā mardhiṣan naḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

एतो॒ इति॑ । नु । इन्द्र॑म् । स्तवा॑म । ईशा॑नम् । वस्वः॑ । स्व॒ऽराज॑म् । न । राध॑सा । म॒र्धि॒ष॒त् । नः॒ ॥ ८.८१.४

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:81» मन्त्र:4 | अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:37» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:4


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शिव शंकर शर्मा

पुनरपि परमात्मा की प्रार्थना आरम्भ करते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (इन्द्र) हे सर्वद्रष्टा परमेश्वर ! जिस कारण तू (महाहस्ती) महाशक्तिशाली है, इसलिये (दक्षिणेन) महाबलवान् हस्त से (नः) हमारे लिये (क्षुमन्तम्) प्रशस्त (चित्रम्) चित्र विचित्र नाना प्रकारयुक्त (ग्राभम्) ग्रहणीय वस्तुओं को (संगृभाय) संग्रह कीजिये ॥१॥
भावार्थभाषाः - वेद आरोप करके कहीं वर्णन करते हैं, अतः यहाँ हस्त का निरूपण है। ज्ञानादिक जो प्रशस्त धन है, उसकी याचना उससे करनी चाहिये ॥१॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

प्रभुस्मरणपूर्वक धनार्जन

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे मित्रो ! (एत उ) = आओ ही । (नु) = अब (इन्द्रं स्तवाम) = उस परमैश्वर्यशाली प्रभु का स्तवन करें। जो प्रभु (वस्वः ईशानम्) = धनों के ईशान हैं, (स्वराजम्) = स्वयं देदीप्यमान हैं। [२] वे प्रभु (नः) = हमें (राधसा) = धन से (न मर्धिषत्) = कुचला नहीं जाने देते। प्रभुस्मरण के साथ अर्जित धन हमें हिंसित करनेवाला नहीं होता। इस धन से न हम विलास में फँसते हैं और न विनष्ट होते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभुस्मरणपूर्वक धनार्जन करते हुए हम धन से कभी विनष्ट न हों।
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शिव शंकर शर्मा

परमात्मनः प्रार्थनं पुनरप्यारभते।

पदार्थान्वयभाषाः - हे इन्द्र ! सर्वद्रष्टः यतस्त्वम्। महाहस्ती=महाहस्तवान् महाशक्तिस्त्वं वर्तसे। अतः। दक्षिणेन=दक्षेण=महाबलवता हस्तेन। नः=अस्मदर्थम्। क्षुमन्तं=प्रशस्तम्। चित्रं=चायनीयम्। ग्राभं=गृहणीयम्। ज्ञानादिकम्। संगृभाय=संगृहाण ॥१॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Come, let us sing and celebrate in honour of Indra, lord and ruler of wealth, self-ruler and self- refulgent. No one would harm us in respect of money, materials and power.