न॒हि त्वा॑ शूर दे॒वा न मर्ता॑सो॒ दित्स॑न्तम् । भी॒मं न गां वा॒रय॑न्ते ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
nahi tvā śūra devā na martāso ditsantam | bhīmaṁ na gāṁ vārayante ||
पद पाठ
न॒हि । त्वा॒ । शू॒र॒ । दे॒वाः । न । मर्ता॑सः । दित्स॑न्तम् । भी॒मम् । न । गाम् । वा॒रय॑न्ते ॥ ८.८१.३
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:81» मन्त्र:3
| अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:37» मन्त्र:3
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:3
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - (अमृताः) हे मरणरहित (देवाः) दिव्यगुणसहित पुरुषो ! (वः) आपको (उत) और (याः+च+देवीः) जो आप लोगों की स्त्रियाँ हैं, उनको भी (एकद्यूः) दैनिक यज्ञकर्ता सदा (अवीवृधत्) बढ़ाते और (अमन्दीत्) आनन्दित करते हैं, अतः (तस्मै+उ) उसको (प्रशस्तम्+राधः) प्रशस्त धन विज्ञान आदि दो और (धियावसुः) हृदयज्ञान और क्रिया में निवासी परमेश्वर हमारे निकट (मक्षू) शीघ्र और (प्रातः) प्रातःकाल ही (जगम्यात्) आवे ॥१०॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
भीमं न+गाम्
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (शूर) = शत्रुओं को शीर्ण करनेवाले प्रभो ! (नहि देवा:) = न देव और (न मर्तासः) = न मनुष्य (दित्सन्तम्) = देने की कामनावाले (त्वा) = आपको (वारयन्ते) = रोक पाते हैं। [२] (भीमं न, गाम्) = आप जैसे शत्रुओं के लिये भयंकर हैं, उसी प्रकार [ गाम् = गम् गतौ] उपासकों के लिये अर्थों के गमक हैं। आप शत्रुओं को नष्ट करके अर्थों को प्राप्त कराते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु शत्रुओं के लिये भयंकर हैं, उपासकों के लिये अर्थों के गमक । देने की कामनावाले प्रभु को कोई रोक नहीं सकता।
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे अमृताः=मरणरहिताः ! हे देवाः ! एकद्यूः= दैनिकयज्ञकर्त्ता। वः=युष्मान्। अवीवृधत्=वर्धयति। स्तुत्या। अमन्दीत्=आनन्दयति। उत=अपि च। युष्माकं मध्ये याः। च+देवीः=देव्यः। ता अपि वर्धयति=आनन्दयति च। ते यूयम्। तस्मै+उ। राधः=धनादिकम्। प्रशस्तम्। कृणुत। युष्माकं कृपया। धियावसुः=हृदयवासी, ज्ञाने विराजमानः। मक्षू=शीघ्रम्। प्रातरेव। जगम्यात्=गच्छेत् ॥१०॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - When you give to bless mankind, no one can stop you, O brave lord, neither mortals nor immortals, just as no one can resist the mighty sun.
