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मा सी॑मव॒द्य आ भा॑गु॒र्वी काष्ठा॑ हि॒तं धन॑म् । अ॒पावृ॑क्ता अर॒त्नय॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

mā sīm avadya ā bhāg urvī kāṣṭhā hitaṁ dhanam | apāvṛktā aratnayaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

मा । सी॒म् । अ॒व॒द्ये । आ । भा॒क् । उ॒र्वी । काष्ठा॑ । हि॒तम् । धन॑म् । अ॒प॒ऽआवृ॑क्ताः । अ॒र॒त्नयः॑ ॥ ८.८०.८

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:80» मन्त्र:8 | अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:36» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:8


शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे इन्द्र ! (हन्तो) यह खेद की बात है कि तू (नु) इस समय (किं+आससे) क्यों चुपचाप है, (नः) हम लोगों के (रथं) रथ को (प्रथमम्) सबसे अग्रसर (कृधि) कर तथा (वाजयु) विजयसम्बन्धी (श्रवः) यश (उपमं) समीप कर ॥५॥
भावार्थभाषाः - हम इस तरह ईश्वर से प्रार्थना करें कि महासंग्राम में भी विजयी होवें ॥५॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

उर्वी काष्ठा

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्रभो ! (सीम्) = निश्चय से आप हमें (अवधे) = पाप में (मा आभाग्) = मत भागी बनाइये । हमें अपनी प्रेरणा द्वारा सदा पापों से बचाइये। (काष्ठा उर्वी) = हमारा लक्ष्य विशाल हो (हितं धनम्) = हम सदा हितकर धन का ही अर्जन करें। [२] (अरत्नयः) = अरममाण शत्रु- आनन्द के विघ्नभूत काम-क्रोध-लोभ आदि शत्रु (अपावृक्ताः) = हमारे से सुदूर परित्यक्त हों।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम पाप से दूर रहें। हमारा लक्ष्य ऊँचा हो। सदा हितकर धन का अर्जन करें। काम-क्रोध आदि को दूर करें।

शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे इन्द्र ! हन्तो=हन्त। नु=इदानीम्। त्वं किमाससे=किं त्वं तूष्णीमाससे। नः=अस्माकम्। रथं संग्रामे। प्रथमम्। कृधि=कुरु। तथा। वाजयु=विजयसम्बन्धि। श्रवः=यशः। उपमं=समीपम्। कृधि=कुरु ॥५॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - The path of life is long and wide, the wealth of life is won. Let no malignity, calumny or dishonour fall to our share. Let all scandalous malcontents and frustrated enemy forces be uprooted.