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इन्द्र॒ दृह्य॑स्व॒ पूर॑सि भ॒द्रा त॑ एति निष्कृ॒तम् । इ॒यं धीॠ॒त्विया॑वती ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

indra dṛhyasva pūr asi bhadrā ta eti niṣkṛtam | iyaṁ dhīr ṛtviyāvatī ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

इन्द्र॑ । दृह्य॑स्व । पूः । अ॒सि॒ । भ॒द्रा । ते॒ । ए॒ति॒ । निः॒ऽकृ॒तम् । इ॒यम् । धीः । ऋ॒त्विय॑ऽवती ॥ ८.८०.७

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:80» मन्त्र:7 | अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:36» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:7


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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे इन्द्र ! सर्वद्रष्टा परमेश्वर (नः) हम लोगों के (रथम्) रथ को महासंग्राम में (प्र+अव) बचा तथा (पश्चात्+चित्+सन्तम्) पीछे विद्यमान भी (मे+एनं) मेरे इस रथ को (पुरस्तात्) अग्रसर (कृधि) कर ॥४॥
भावार्थभाषाः - महा संग्राम में विजयप्राप्ति के लिये उसी से प्रार्थना करे ॥४॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

पूरणकर्ता 'पू: ' प्रभु

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (इन्द्र) = शत्रुओं का विद्रावण करनेवाले प्रभो ! (दृह्यस्व) = आप हमें दृढ़ बनाइये । (पूः असि) = आप हमारा पालन व पूरण करनेवाले हैं। [२] (इयम्) = यह (ऋत्वियावती) = ऋतु - ऋतु में होनेवाली - समय-समय पर होनेवाली (भद्रा) = कल्याणकारिणी (धीः) = बुद्धिपूर्वक की गई स्तुति (ते) = आपके (निष्कृतम्) = संस्कृत हृदयरूप स्थान में एति प्राप्त होती है। हम हृदयस्थित आपका स्तवन करते हैं। आपने ही तो हमें दृढ़ बनाना है- आपने ही हमारा पूरण करना है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्रभु का स्तवन करते हैं। प्रभु हमें दृढ़ बनाते हैं और हमारा पूरण करते हैं।
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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे इन्द्र ! नः=अस्माकम्। रथम्+प्राव। हे अद्रिवः=संसाररक्षक ! एनं+मे=मम रथम्। पश्चाच्चित्सन्तम्=पश्चाद् विद्यमानमपि। पुरस्ताद्= अग्रगामिनम्। कृधि=कुरु ॥४॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, pray strengthen us as determined on good works. You are the stronghold of protection and giver of fulfilment. This conscientious prayer, in truth and according to time and season reaches you. Pray help us reach the target.