हन्तो॒ नु किमा॑ससे प्रथ॒मं नो॒ रथं॑ कृधि । उ॒प॒मं वा॑ज॒यु श्रव॑: ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
hanto nu kim āsase prathamaṁ no rathaṁ kṛdhi | upamaṁ vājayu śravaḥ ||
पद पाठ
हन्तो॒ इति॑ । नु । किम् । आ॒स॒से॒ । प्र॒थ॒मम् । नः॒ । रथ॑म् । कृ॒धि॒ । उ॒प॒ऽमम् । वा॒ज॒ऽयु । श्रवः॑ ॥ ८.८०.५
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:80» मन्त्र:5
| अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:35» मन्त्र:5
| मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:5
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे ईश्वर ! (यः) जो तू (अमृध्रः) अविनश्वर चिरस्थायी देव है, इसलिये तू (शश्वत्) सर्वदा (पुरा) पूर्वकाल से लेकर आजतक (वाजसातये) ज्ञान और धनप्राप्ति के लिये (नः) हम लोगों को (आविथ) बचाता आया है, (सः त्वम्) वह तू (नः) हम लोगों को (मृळय) सुखी बना ॥२॥
भावार्थभाषाः - ईश्वर सदा जीवों की रक्षा किया करता है, इसलिये अन्तःकरण से अपने अभीष्ट की प्राप्ति के लिये उससे प्रार्थना करे ॥२॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
वाजयु श्रवः
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्रभो ! (हन्त नु) = यह दुःख की ही बात है कि (नु किं आससे) = आप अब भी क्यों बैठे ही हैं? आप हमारे पर अनुग्रह करिये और (नः) = हमारे (रथम्) = शरीररथ को (प्रथमं कृधि) = सर्वप्रथम करिये। 'हमारा यह रथ सब से आगे हो' बस ऐसी ही कृपा आप करिये। [२] आपके अनुग्रह से (वाजयु श्रवः) = हमारे साथ शक्ति को जोड़नेवाला ज्ञान (उपमम्) = हमारे अन्तिकतम हो। हमें शक्तियुक्त ज्ञान प्राप्त हो। इसे प्राप्त कराने में आप विलम्ब न करिये।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु हमारे सरीर-रथ को आगे उन्नतिशील बनाते हैं।
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे इन्द्र ! यस्त्वम्। अमृध्रः=अहिंसकः अविनश्वरः। शश्वत्=सर्वदा। पुरा=पूर्वस्मिन् काले। नः=अस्मान्। वाजसातये=ज्ञानलाभाय। आविथ=रक्षितवान्। स त्वम्। नः=अस्मान्। हे इन्द्र ! मृळय ॥२॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Hey Indra, come on, why tarry behind? Move our chariot on to the front rank, let the honour and prize of victory be closer at hand.
