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मा न॑: सोम॒ सं वी॑विजो॒ मा वि बी॑भिषथा राजन् । मा नो॒ हार्दि॑ त्वि॒षा व॑धीः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

mā naḥ soma saṁ vīvijo mā vi bībhiṣathā rājan | mā no hārdi tviṣā vadhīḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

मा । नः॒ । सो॒म॒ । सम् । वी॒वि॒जः॒ । मा । वि । बी॒भि॒ष॒था॒ । रा॒ज॒न् । मा । नः॒ । हार्दि॑ । त्वि॒षा । व॒धीः॒ ॥ ८.७९.८

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:79» मन्त्र:8 | अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:34» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:8


शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे ईश ! जगत् में आपकी कृपा से (अर्थिनः) धनाभिलाषी जन (अर्थं+यन्ति+चेत्) धन प्राप्त करें और दीन पुरुष (ददुषः) दाता से (रातिं) दान (गच्छान्+इत्) पावें और (तृषतः) धन और पानी के पिपासु जन के (कामम्) मनोरथ को (ववृज्युः) लोग पूर्ण करें ॥५॥
भावार्थभाषाः - हे मनुष्यों ! तुम परस्पर साहाय्य करो। न जाने तुम्हारे ऊपर भी अचिन्त्य आपत्ति आवे और सहायता की आकाङ्क्षा हो, इसलिये परस्पर प्रेम और भ्रातृभाव से वर्ताव करो ॥५॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'उद्वेग व भय' से दूर

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सोम) = वीर्यशक्ते ! तू (नः) = हमें (मा संवीविजः) = मत उद्विग्न होने दे। तेरे रक्षण से हमारे हृदय शान्त बने रहें। हे (राजन्) = हमारे जीवनों को दीप्त बनानेवाले सोम ! (मा वि बीभिषथा:) = हमें रोग आदि के भय से आक्रान्त मत होने दे। [२] हे सोम ! तू (नः) = हमें (हार्दि) = हृदयों में (त्विषा) = ज्ञानदीप्ति के द्वारा (मा वधीः) = काम आदि शत्रुओं से हिंसित मत होने दे।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सुरक्षित सोम हमें उद्वेग व रोगों के भय से मुक्त करता है। यह हमें ज्ञानदीप्ति प्राप्त कराके काम-क्रोध से हिंसित नहीं होने देता।

शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे ईश ! तव कृपया। अर्थिनः=अर्थाभिलाषिणः। अर्थं+यन्ति+चेत्=प्राप्नुवन्तु। ददुषः=दातुः सकाशात्। रातिं=दानम्। गच्छान्+इत्=प्राप्नुवन्तु एव। तृष्यतः=धनाय तृष्णावतः पुरुषस्य। कामम्=मनोरथम्। ववृज्युः=पूरयन्तु ॥५॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O Soma, ruler and peace giver of the world, disturb us not from our state of settlement, strike us not with fear, torture us not with the flames of passion and pride.