सु॒शेवो॑ नो मृळ॒याकु॒रदृ॑प्तक्रतुरवा॒तः । भवा॑ नः सोम॒ शं हृ॒दे ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
suśevo no mṛḻayākur adṛptakratur avātaḥ | bhavā naḥ soma śaṁ hṛde ||
पद पाठ
सु॒ऽशेवः॑ । नः॒ । मृ॒ळ॒याकुः॑ । अदृ॑प्तऽक्रतुः । अ॒वा॒तः । भव॑ । नः॒ । सो॒म॒ । शम् । हृ॒दे ॥ ८.७९.७
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:79» मन्त्र:7
| अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:34» मन्त्र:2
| मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:7
0 बार पढ़ा गया
शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे (ऋजीषिन्) सज्जन साधुजनों के रक्षक और अभिलाषिन् ! (त्वं) तू (चित्ती) अपनी अचिन्त्य शक्ति और मन से (तव+दक्षैः) अपने महान् बल से (दिवः) द्युलोक से (आ) और (पृथिव्याः) पृथिवी पर से (अघस्य) पापी जनों के (द्वेषः) द्वेषों को (यावीः) दूर कर दे ॥४॥
भावार्थभाषाः - इससे यह शिक्षा दी जाती है कि मनुष्यमात्र द्वेष और निन्दा आदि अवगुण त्याग दे, तब ही जगत् का कल्याण है ॥४॥
0 बार पढ़ा गया
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
सुशेवः+अवातः [सोमः]
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सोमः) = वीर्यशक्ते! शरीर में सुरक्षित हुई तू (नः हृदे) = हमारे हृदयों के लिये (शं भवा) = शान्ति को देनेवाली हो। सुरक्षित वीर्य हमें शान्त हृदय बनाता है। [२] यह सोम (नः) = हमारे लिये (सुशेवः) = उत्तम कल्याण को करनेवाला हो । (मृडयाकुः) = यह हमें सुखी करे। (अदृप्तक्रतुः) = यह हमें गर्वशून्य ज्ञान व शक्तिवाला बनाये तथा (अवातः) = [वा To injure, न वातं यस्मात् ] सब प्रकार की हानियों से- रोगादि के आक्रमणों से बचाये।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - शरीर में सुरक्षित सोम हमें शान्त हृदयवाला बनाता है। यह हमें शरीर व मन से सुखी करता है । शक्ति व ज्ञान के होने पर भी हमें निरभिमान बनाता है और रोगादि से आक्रान्त नहीं होने देता।
0 बार पढ़ा गया
शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - ऋजीषिन्=हे ऋजुजनाभिलाषिन् ! त्वं+चित्ती=चित्त्या मनसा। तव+दक्षैः=स्वकीयबलैः। दिवः=द्युलोकात्। आ पुनः पृथिव्याः। अघस्य+चित्=पापस्य चित्। द्वेषः। यावीः=पृथक् कुरु ॥४॥
0 बार पढ़ा गया
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Soma, you are the giver of peace and bliss for us, merciful, sober at heart and beyond all disturbance and agitation. O lord, bless us with peace and well being at heart.
