वांछित मन्त्र चुनें

त्वं चि॒त्ती तव॒ दक्षै॑र्दि॒व आ पृ॑थि॒व्या ऋ॑जीषिन् । यावी॑र॒घस्य॑ चि॒द्द्वेष॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tvaṁ cittī tava dakṣair diva ā pṛthivyā ṛjīṣin | yāvīr aghasya cid dveṣaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

त्वम् । चि॒त्ती । तव॑ । दक्षैः॑ । दि॒वः । आ । पृ॒थि॒व्याः । ऋ॒जी॒षि॒न् । यावीः॑ । अ॒घस्य॑ । चि॒त् । द्वेषः॑ ॥ ८.७९.४

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:79» मन्त्र:4 | अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:33» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:4


0 बार पढ़ा गया

शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - (अयं) प्रकृतियों में प्रत्यक्षवत् भासमान यह परमात्मा (कृत्नुः) जगत् का कर्ता (अगृभीतः) किन्हों से किसी साधन द्वारा ग्रहण योग्य नहीं, (विश्वजित्) विश्वविजेता (उद्भिद्+इत्) जगत् का उत्थापक (सोमः) सर्वप्रिय (ऋषिः) सर्वद्रष्टा (विप्रः) सन्तों के मनोरथ का पूरक और (काव्येन) काव्य द्वारा स्तुत्य है ॥१॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा सर्वगुणसम्पन्न है, अतः वही स्तुत्य और प्रार्थनीय है ॥१॥
0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

चित्ती+दक्षैः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (ऋजीषिन्) = ऋजुता [=सरलता] के मार्ग की प्रेरणा देनेवाले प्रभो ! (त्वम्) = आप (तव) = अपने (चित्ती) = ज्ञान से तथा (दक्षैः) = बलों से (दिवः) = मस्तिष्क के दृष्टिकोण से तथा (पृथिव्याः) = शरीर के दृष्टिकोण से [पृथिवी शरीरम्] (अघस्य) = हमारा हनन करनेवाले पापी के (चित्) = भी (द्वेषः) = द्वेष को (आयावी:) = सर्वतः हमारे से पृथक् करिये। [२] ज्ञान और बल हमें द्वेष से दूर करते हैं । द्वेष के अभाव में ज्ञान और बल की वृद्धि होती है। तभी मस्तिष्क व शरीर का ठीक से विकास हो पाता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु हमें ज्ञान व शक्ति देकर द्वेष से दूर करें। निर्देषता हमारे मस्तिष्क व शरीर को ठीक रखती है।
0 बार पढ़ा गया

शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - अयं=प्रकृतिषु प्रत्यक्षवत् भासमानः परमात्मा। कृत्नुः=संसारस्य कर्ता। अगृभीतः=अगृहीतः कैश्चिदपि केनापि साधनेन न गृहीतः। विश्वजित्=विश्वविजेता। उद्भिद् इत्=जगत उद्भेत्ता एव। सोमः=सर्वप्रियः। ऋषिः=सर्वद्रष्टा विप्रः। विशेषेण पूरकः। काव्येन स्तुत्यश्च ॥१॥
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Soma, lover of peace and joy, protector of the simple and honest people of rectitude, by your divine love and kindness of heart and your universal potential of the light of heaven, drive away the jealousy and enmity of the sinners and criminals from all over the earth.