त्वे वसू॑नि॒ संग॑ता॒ विश्वा॑ च सोम॒ सौभ॑गा । सु॒दात्वप॑रिह्वृता ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
tve vasūni saṁgatā viśvā ca soma saubhagā | sudātv aparihvṛtā ||
पद पाठ
त्वे इति॑ । वसू॑नि । सम्ऽग॑ता । विश्वा॑ । च॒ । सो॒म॒ । सौभ॑गा । सु॒ऽदातु॑ । अप॑रिऽह्वृता ॥ ८.७८.८
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:78» मन्त्र:8
| अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:32» मन्त्र:3
| मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:8
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - (इन्द्रः) सर्वद्रष्टा परमेश्वर का (निकर्तवे) तिरस्कार (नैव) कोई भी नहीं कर सकता। जिस हेतु वह (शक्रः) सर्वशक्तिमान् है, अतः (न+परिशक्तवे) उसका कोई भी पराभव नहीं कर सकता। वह (विश्वम्+शृणोति) सब सुनता (पश्यति) और देखता है ॥५॥
भावार्थभाषाः - जिस कारण वह सर्वद्रष्टा सर्वश्रोता है, अतः उसको कोई भी परास्त नहीं करता। हे मनुष्यों ! उसी की उपासना करो ॥५॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
वसूनि + सौभगा
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (सोम) = सोम का पान करनेवाले [सोमपायिन्] इन्द्र ! (त्वे) = आप में (वसूनि) = निवास के लिये आवश्यक सब तत्त्व - सब धन संगता-संगत होते हैं। (च) = और आप में ही सब (शौभगा) = सौभाग्य संगत हुए हैं। सोमशक्ति का रक्षण हमारे जीवनों को भी वसुओं और सौभाग्यों से संगत करे। [२] हे प्रभो! आपके (सुदानु) = उत्तम दान (अपरिहृता) = कुटिलता से रहित हैं। प्रभु के अनुग्रह से हमें 'स्वास्थ्य, पवित्रता व ज्ञानदीप्ति' प्राप्त होती है। इनके प्राप्त होने से हमारा जीवन अकुटिल बनता है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु के अनुग्रह से हमें सब वसु व सौभाग्य प्राप्त हों। ये वसु व सौभाग्य हमारे जीवनों को अकुटिल बनाएँ।
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - इन्द्रः=सर्वद्रष्टा परमेश्वरः। निकर्तवे=निकर्तुं=तिरस्कर्तुम्। नकीं=नैव। शक्यः। यतः। स शक्रः=सर्वशक्तिमानस्ति अतः स परिशक्तवे=परिभवितुं न शक्यः। स विश्वं सर्वं शृणोति। पश्यति च ॥५॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O Soma, lord of peace and joy, in you concentrate all wealth, honour and excellences of the world, all good fortunes, spontaneous generosity, free from crookedness and ambiguity as you are, simple and straight, no double dealing.
