वांछित मन्त्र चुनें

नकीं॑ वृधी॒क इ॑न्द्र ते॒ न सु॒षा न सु॒दा उ॒त । नान्यस्त्वच्छू॑र वा॒घत॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

nakīṁ vṛdhīka indra te na suṣā na sudā uta | nānyas tvac chūra vāghataḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

नकी॑म् । वृ॒धी॒कः । इ॒न्द्र॒ । ते॒ । न । सु॒ऽसाः । न । सु॒ऽदाः । उ॒त । न । अ॒न्यः । त्वत् । शू॒र॒ । वा॒घतः॑ ॥ ८.७८.४

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:78» मन्त्र:4 | अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:31» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:4


0 बार पढ़ा गया

शिव शंकर शर्मा

पुनः ईश्वर की प्रार्थना करते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (इन्द्र) हे सर्वद्रष्टा सर्वशक्ते हे महेन्द्र ! (नः) हम प्राणियों को (पुरोळाशम्) जो आगे में दिया जाय अर्थात् खाने पीने योग्य (अन्धसः) अन्न (सहस्रम्) सहस्रों प्रकारों का (आभर) दो (च) और (गोनाम्+शता) बहुविध गौ, महिष, अश्व, मेष और अज आदि पशु दीजिये ॥१॥
भावार्थभाषाः - ईश्वर सर्व पदार्थ का दाता है, अतः अपनी आवश्यक वस्तु उससे माँगनी चाहिये ॥१॥
0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

वृधीक, सुषा व सुदा

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो ! (वाधतः) = ऋत्विओं- यज्ञशील पुरुषों का (त्वत् अन्यः) = आपसे भिन्न कोई और (वृधीकः) = बढ़ानेवाला (नकीम्) = नहीं है। आप ही सब यज्ञशील पुरुषों के बढ़ानेवाले हैं । [२] हे (शूर) = शत्रुओं को शीर्ण करनेवाले प्रभो ! (न ते सुषा:) = आपका कोई भी (सुष्ठु) = सम्भजन करनेवाला नहीं है। संग्राम आदि में आप ही इन ऋत्विजों के संभक्ता [=साथ देनेवाले] होते हैं। (उत) = और (न सुदा:) = आपके समान कोई और उत्तम दाता नहीं । न वस्तुतः आपसे भिन्न कोई नहीं है। आपसे पृथक् स्थान में किसी की सत्ता नहीं है। प्रकृति व जीव सब आपके आधार से ही हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम यज्ञशील बनें। प्रभु ही यज्ञशील पुरुषों के बढ़ानेवाले, संग्राम में साथ देनेवाले व सब उत्तम साधनों व पदार्थों को देनेवाले हैं।
0 बार पढ़ा गया

शिव शंकर शर्मा

पुनरपीश्वरः प्रार्थ्यते।

पदार्थान्वयभाषाः - हे इन्द्र=महेन्द्र सर्वद्रष्टः सर्वशक्ते देव ! नः=अस्मभ्यम्। पुरोळाश=पुरतो दीयमानम्। अन्धसः=अन्नम्। सहस्रं= सहस्रसंख्याकम्। आभर=आहर देहि। हे शूर ! गोनां=गवादीनां=पशूनाम्। शता च देहि ॥१॥
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - No one augments the beauty and glory of life other than you, none else the giver, none else is the sharer, none else, O brave and generous lord, a better guide and greater leader of the wise.