अ॒न्यम॒स्मद्भि॒या इ॒यमग्ने॒ सिष॑क्तु दु॒च्छुना॑ । वर्धा॑ नो॒ अम॑व॒च्छव॑: ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
anyam asmad bhiyā iyam agne siṣaktu ducchunā | vardhā no amavac chavaḥ ||
पद पाठ
अ॒न्यम् । अ॒स्मत् । भि॒यै । इ॒यम् । अग्ने॑ । सिस॑क्तु । दु॒च्छुना॑ । वर्ध॑ । नः॒ । अम॑ऽवत् । शवः॑ ॥ ८.७५.१३
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:75» मन्त्र:13
| अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:26» मन्त्र:3
| मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:13
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - (अग्ने) हे सर्वाधार (देव) दिव्यगुणसम्पन्न ईश ! (कृष्टयः) प्रजागण (ओजसे) बलप्राप्ति करने के लिये (ते) तुमको (नमः+गृणन्ति) नमस्कार करते हैं। वह तू (अमैः) अपने नियमों से (अमित्रम्) जगत् के शत्रुओं को (अर्दय) दूर कर ॥१०॥
भावार्थभाषाः - प्रत्येक आदमी को उचित है कि वह परस्पर द्रोह की चिन्ता से अलग रहे, तब ही जगत् के शत्रुसमूह चूर्ण हो सकते हैं ॥१०॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
अमवत् शवः
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अग्ने) = अग्रेणी प्रभो ! (इयम्) = यह (दुच्छुना) = दुष्ट गति [दुराचरण] (अस्मत् अन्यम्) = हमारे से भिन्न ही किसी व्यक्ति को (भिया सिषक्तु) = भय के साथ सेवन करे। हमारे से यह सदा दूर रहे। दूसरा हमारे साथ अशुभ व्यवहार भी करे, तो भी हम दुष्ट गति को स्वीकार न करें। [२] हे प्रभो ! आप (नः) = हमारे (अमवत्) = शक्तियुक्त (शवः) = वेग को-स्फूर्ति के साथ कार्य करने की प्रवृत्ति को (वर्धा) = बढ़ाइये। सदा स्फूर्ति के साथ कर्त्तव्यकर्मों को करते हुए हम अशुभाचरण से बचे रहें।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- दुष्ट आचरण हमें छोड़ जाये। शुभ आचरण हमें सदा सबल बनाये रखें।
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - अग्ने=सर्वाधार ! हे देव=दिव्यगुणसम्पन्न ! कृष्टयः=प्रजाः। ओजसे=बलाय। ते=तुभ्यम्। नमः+गृणन्ति=नमः शब्दमुच्चारयन्ति। स त्वम्। अमैः=स्वनियमैः। अमित्रं= संसारशत्रुम्। अर्दय=विनाशय ॥१०॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Agni, let this evil and calamity fall upon something else opposed to us and our life and health and frighten all such things away. Pray promote our inward strength and courage like our steadfast patience and vitality.
