मा नो॑ अ॒स्मिन्म॑हाध॒ने परा॑ वर्ग्भार॒भृद्य॑था । सं॒वर्गं॒ सं र॒यिं ज॑य ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
mā no asmin mahādhane parā varg bhārabhṛd yathā | saṁvargaṁ saṁ rayiṁ jaya ||
पद पाठ
मा । नः॒ । अ॒स्मिन् । म॒हा॒ऽध॒ने । परा॑ । वर्क् । भा॒र॒ऽभृत् । य॒था॒ । स॒म्ऽवर्ग॑म् । सम् । र॒यिम् । ज॒य॒ ॥ ८.७५.१२
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:75» मन्त्र:12
| अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:26» मन्त्र:2
| मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:12
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - (समस्य) समस्त (दूढ्यः) दुर्बुद्धियों और (परिद्वेषसः) जगत् के महा द्वेषियों का (अंहतिः) हननास्त्र अथवा पाप (नः) हम लोगों का (म+आवधीत्) वध न करे। (न) जैसे (ऊर्मिः) समुद्रतरङ्ग (नावम्) नौकाओं को छिन्न-भिन्न कर नष्ट कर देती है ॥९॥
भावार्थभाषाः - दुर्बुद्धियों और द्वेषी पुरुषों से हम सदा पृथक् रहें। ऐसा न हो कि उनका संसर्ग हम लोगों को भी कुपथ में ले जाकर नष्ट कर दे। जैसे कुपित समुद्रतरङ्ग जहाजों को तोड़कर डुबा देता है ॥९॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
सं वर्णं, सं रयिं [जय]
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्रभो! आप (अस्मिन्) = इस (महाधने) = महान् संग्राम में (नः) = हमें (मा परावर्ग) = दूर छोड़ मत दीजिए। (यथा) = जैसे (भारमृत्) = भार को उठानेवाला अन्त में भार को छोड़ देता है, इसी प्रकार हमें आप छोड़ मत दीजिये । हम आपके भारभूत न बन जाएँ। [२] हे प्रभो! आप हमारे लिये (सं वर्गम्) = सम्यक् शत्रुओं के वर्जन का जय-विजय कीजिये। यहाँ हमारे लिये (रयिम्) = ऐश्वर्य को (सं जय) = सम्यक् जीतिये । हम आपके अनुग्रह से सम्यक् शत्रुओं का विजय करें तथा ऐश्वर्यों को प्राप्त करनेवाले हों।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु हमको कामादि शत्रुओं से विजय प्राप्त कराकर हमें ऐश्वर्य युक्त करता है।
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - समस्य=समस्तस्य। दूढ्यः=दुर्धियः। परिद्वेषसः=परितो द्विषतः। जनस्य। अंहतिः=हननसाधनं तत्कृतपापं वा। नः=अस्मान्। मा+वधीत्। अत्र दृष्टान्तः। ऊर्मिर्न=यथा समुद्रतरङ्गः। नावम् ॥९॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Agni, do not abandon us in this great battle of life like a tired burden bearer throwing off his burden. Instead, win holy wealth like the yajaka gathering sacred grass for the vedi to perform the yajna.
