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सा ते॑ अग्ने॒ शंत॑मा॒ चनि॑ष्ठा भवतु प्रि॒या । तया॑ वर्धस्व॒ सुष्टु॑तः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

sā te agne śaṁtamā caniṣṭhā bhavatu priyā | tayā vardhasva suṣṭutaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

सा । ते॒ । अ॒ग्ने॒ । शम्ऽत॑मा । चनि॑ष्ठा । भ॒व॒तु॒ । प्रि॒या । तया॑ । व॒र्ध॒स्व॒ । सुऽस्तु॑तः ॥ ८.७४.८

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ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:74» मन्त्र:8 | अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:22» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:8


शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे ज्ञानिजनो ! (अमृतम्) अविनश्वर और मुक्तिदाता (जातवेदसम्) जिससे सर्व विद्या धनादि उत्पन्न हुए हैं और हो रहे हैं, जो (तमांसि+तिरः) अज्ञानरूप अन्धकारों को दूर करनेवाला है, (दर्शतम्) दर्शनीय (घृताऽऽहवनम्) घृतादि पदार्थदाता और (ईड्यम्) स्तवनीय है, उसकी कीर्ति गाओ ॥५॥
भावार्थभाषाः - अमृत=जिस कारण उसकी कभी मृत्यु नहीं होती, अन्धकार से वह पर और उन्हें निर्मूल करनेवाला है और सर्ववस्तुप्रदाता है, अतः वही पूज्य है ॥५॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

चनिष्ठा [स्तुति]

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अग्ने) = परमात्मन् ! (सा) = वह (ते) = आपकी हमारे से की जाती हुई [नव्यसी मति: ७] स्तुति (शन्तमा) = अतिशयेन शान्ति को देनेवाली (भवतु) = हो । वह स्तुति (चनिष्ठा) = हमारे सब काम आदि शत्रुओं का संहार करनेवाली हो। यह हमारे हृदयों में प्रेरणा को देनेवाली हो यह हमें अतिशयित आनन्द को देनेवाली हो तथा यह हमें पर्याप्त भोजनों को भी प्राप्त करानेवाली हो, इस प्रकार यह स्तुति (प्रिया) = प्रीतिजनक हो । [२] (तया) = उस स्तुति से (सुष्टुतः) = सम्यक् स्तुत हुए- हुए आप (वर्धस्व) = हमारे हृदयों में बढ़िये । स्तुति हमें आपके गुणों से युक्त करनेवाली हो। आपकी दिव्यता का इस स्तुति द्वारा हमारे में अवतरण हो ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभुस्तवन से 'शान्ति, प्रभुप्रेरणा, शत्रुसंहार, आनन्द, सब अन्न व प्रीति' प्राप्त होती है। इससे हमारे में दिव्यता का वर्धन होता है।

शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे ज्ञानिजनाः ! अमृतम्=अविनश्वरम्। जातवेदसम्। तमांसि=अज्ञानानि तिरस्कर्तारम्। दर्शतम्+घृताऽऽहवनम्= घृतादीनां दातारम्। ईड्यं=स्तुत्यं तमीशं भजध्वमिति शेषः ॥५॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Agni, that light and wisdom of yours, most blissful, most delightful, may be dear to us. And let our adorations too be dear to you. Exalted by that, arise and grow and let us grow too.