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अ॒श्विना॑ याम॒हूत॑मा॒ नेदि॑ष्ठं या॒म्याप्य॑म् । अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

aśvinā yāmahūtamā nediṣṭhaṁ yāmy āpyam | anti ṣad bhūtu vām avaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अ॒श्विना॑ । या॒म॒ऽहूत॑मा । नेदि॑ष्ठम् । या॒मि॒ । आप्य॑म् । अन्ति॑ । सत् । भू॒तु॒ । वा॒म् । अवः॑ ॥ ८.७३.६

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:73» मन्त्र:6 | अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:19» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:6


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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - राजा के प्रति द्वितीय कर्त्तव्य का उपदेश (अश्विना) हे प्रशस्ताश्वयुक्त महाराज तथा मन्त्री ! आप दोनों (अत्रये) मातृपितृभ्रातृविहीन जन के (धर्मम्) सन्तापक भूख आदि क्लेश को (हिमेन) हिमवत् शीत अन्नादिक से (उप+स्तृणीतम्) शान्त कीजिये (अन्ति) इत्यादि का अर्थ पूर्व में हो चुका ॥३॥
भावार्थभाषाः - नोट−अत्रि० १−ईश्वर को छोड़कर तीनों लोकों में जिसका कोई रक्षक नहीं है, वह अत्रि। यद्वा−
टिप्पणी: २−त्रि=त्र=रक्षण, रक्षार्थक त्रै धातु से त्रि बनता है। जिसका रक्षण कहीं से न हो, वह अत्रि। ३−यद्वा माता, पिता और भ्राता ये तीनों जिसके न हों, वह अत्रि। ऐसे आदमी की रक्षा राजा करे, यह उपदेश है ॥३॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'नेदिष्ठ आप्य' की प्राप्ति

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अश्विना) = प्राणापानो! आप (याम - हूतमा) = समय पर अतिशयेन आह्वातव्य हो । हमें समय पर आपकी आराधना करनी ही चाहिए। यह नियमपूर्वक प्राणों की साधना ही 'शरीर, मन व बुद्धि' को निर्दोष बनानेवाली है। [२] हे प्राणापानो! मैं आप से (नेदिष्ठम् आप्यं) = अन्तिकतम बन्धुत्व को- उस प्रभु की मित्रता को (यामि) = माँगता हूँ [याचामि] । (वाम्) = आपका (अवः) = रक्षण (सत्) = उत्तम है। वह (अन्ति भूतु) = हमें सदा समीपता से प्राप्त हो। आपके रक्षण के द्वारा ही हमें प्रभु की मित्रता प्राप्त होगी।
भावार्थभाषाः - भावार्थ:-प्राणसाधना के द्वारा ही हमें प्रभु की मित्रता प्राप्त होती है।
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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे अश्विना=अश्विनौ। अत्रये=अत्रेः षष्ठ्यर्थे चतुर्थी। त्रिषु लोकेषु ईश्वराद् भिन्नो न कश्चिद्रक्षको विद्यते यस्य सोऽत्रिः। साहाय्यहीनः। यद्वा त्रि=त्रं रक्षणम्। त्रैङ् पालने अस्माद्धातोः। यद्वा न त्रयो माता पिता भ्राता च यस्य सोऽत्रिः। मातृपितृभ्रातृविहीनः। ईदृशस्य अत्रेः। धर्मं सन्तापकं बुभुक्षादिकम्। हिमेन=हिमवच्छीतलेन अन्नादिना। उपस्तृणीतम्=शमयतम् ॥३॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Openly and instantly approachable Ashvins, I come to you as my own people at the closest. Let your protections be instant and sure for us at the earliest and closest.