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उप॑ स्तृणीत॒मत्र॑ये हि॒मेन॑ घ॒र्मम॑श्विना । अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

upa stṛṇītam atraye himena gharmam aśvinā | anti ṣad bhūtu vām avaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

उप॑ । स्तृ॒णी॒त॒म् । अत्र॑ये । हि॒मेन॑ । घ॒र्मम् । अ॒श्वि॒ना॒ । अन्ति॑ । सत् । भू॒तु॒ । वा॒म् । अवः॑ ॥ ८.७३.३

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:73» मन्त्र:3 | अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:18» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:3


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

सोमरक्षण

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अश्विना) = प्राणापानो! आप (अत्रये) = 'काम-क्रोध व लोभ' इन तीनों से ऊपर उठनेवाले के लिए (घर्मं) = शरीर में होनेवाली शक्ति को उष्णता को (हिमेन) = प्रभु के स्तुतिवचनों द्वारा उत्पन्न शान्ति से- बर्फ से - (उपस्तृणीत) = आच्छादित करो। इस सोमकणों में वासना का उबाल न पैदा हो जाए। [२] हे प्राणापानो! (वाम् अवः सत्) = आपका रक्षण उत्तम है। यह रक्षण (अन्ति भूतु) = हमारे समीप हो ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्राणसाधना से सोम [वीर्य] की शरीर में ऊर्ध्वगति होती है। वासनाओं के विनाश से सोम शान्त बना रहता है-उसमें उबाल नहीं आता।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - With the cool of comfort and security like snow, cover the misfortunes of the man bereft of threefold security for body, mind and soul in life. Let your protections be with us at the closest.