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नि॒मिष॑श्चि॒ज्जवी॑यसा॒ रथे॒ना या॑तमश्विना । अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

nimiṣaś cij javīyasā rathenā yātam aśvinā | anti ṣad bhūtu vām avaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

नि॒मिषः॑ । चि॒त् । जवी॑यसा । रथे॑न । आ । या॒त॒म् । अ॒श्वि॒ना॒ । अन्ति॑ । सत् । भू॒तु॒ । वा॒म् । अवः॑ ॥ ८.७३.२

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:73» मन्त्र:2 | अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:18» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:2


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

जवीयसा रथेन [लघुलम्]

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (निमिषः चित् जवीयसा) = आँख की पलक से भी अधिक वेगवान् (रथेन) = शरीररथ से हे (अश्विना) = प्राणापानो! आप (आयातम्) = हमें प्राप्त होओ। प्राणसाधना के द्वारा शरीररथ में अद्भुत स्फूत उत्पन्न हो जाती है, लघुत्व आ जाता है। [२] हे प्राणापानो ! (वाम् अवः सत्) = आपके द्वारा प्राप्त रक्षण उत्तम है। वह (अन्ति भूतु) = हमें समीपता से प्राप्त हो। हम सदा प्राणसाधनावाले हों ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्राणसाधना द्वारा शरीररथ स्फूतवाला [शीघ्र गतिवाला] बनता है। इसमें लघुत्व उत्पन्न हो जाता है।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Within a wink of the eye, come by the chariot of instant speed. Let your protections be with us at the closest.