स॒मा॒नं वां॑ सजा॒त्यं॑ समा॒नो बन्धु॑रश्विना । अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
samānaṁ vāṁ sajātyaṁ samāno bandhur aśvinā | anti ṣad bhūtu vām avaḥ ||
पद पाठ
स॒मा॒नम् । वा॒म् । स॒ऽजा॒त्य॑म् । स॒मा॒नः । बन्धुः॑ । अ॒श्वि॒ना॒ । अन्ति॑ । सत् । भू॒तु॒ । वा॒म् । अवः॑ ॥ ८.७३.१२
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:73» मन्त्र:12
| अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:20» मन्त्र:2
| मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:12
0 बार पढ़ा गया
शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे अश्विद्वय ! तुम्हारे राज्य में (सप्तवध्रिः) काव्यों में सप्त छन्दों के बाँधनेवाले महाकवि महर्षि (आशसा) ईश्वर की स्तुति की सहायता से (अग्नेः) प्रजाओं की बुभुक्षा, पिपासा आदि अग्निसमान सन्तापक रोग की (धाराम्) महा ज्वाला को (प्र+अशायत) प्रशमन करते हैं। आप भी धन और रक्षा की सहायता से वैसा कीजिये ॥९॥
0 बार पढ़ा गया
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'सम् आनता' [=सम्यक् जीवन]
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अश्विना) = प्राणापानो! (वां) = आपका (सजात्यं समानम्) = समानरूप से प्रादुर्भाव हमें सम्यक् प्रीणित करनेवाला है। प्राणापान का प्रादुर्भाव हमारे में जीवनीशक्ति का संचार करता है। हे प्राणापानो! आपका (बन्धुः) = अपनें में बाँधनेवाला व्यक्ति (समानः) = आपने को सम्यक् प्रीणित करनेवाला होता है। [ सम् आनयति] प्राणसाधना से जीवनशक्ति का विकास होता ही है। [२] सो (वाम्) = आपका (सत् अवः) = उत्तम रक्षण (अन्ति भूतु) = हमारे समीप हो- हमें सदा प्राप्त हो ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्राणसाधना हमारे में जीवनशक्ति का संचार करती है।
0 बार पढ़ा गया
शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे अश्विनौ ! युवयो राज्ये। सप्तवध्रिः=सप्त गायत्र्यादीनि छन्दांसि बध्नानि काव्येषु यः स सप्तवध्रिर्महाकविर्महर्षिः। आशसा=भगवत्प्रशंसया। अग्नेः=प्रजानां बुभुक्षापिपासादि-रूपस्य अग्नेरग्निवत्संतापकस्यारोगस्य। धारां=ज्वालाम्। प्र+अशायत=प्रशमयति। युवामपि तथा कुरुतमित्यर्थः ॥९॥
0 बार पढ़ा गया
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - You are the same class and character as we, equal, the same brotherhood with us. Ashvins, let your protections and promotions be with us at the closest at the same level of class, character and species.
