किमि॒दं वां॑ पुराण॒वज्जर॑तोरिव शस्यते । अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
kim idaṁ vām purāṇavaj jarator iva śasyate | anti ṣad bhūtu vām avaḥ ||
पद पाठ
किम् । इ॒दम् । वा॒म् । पु॒रा॒ण॒ऽवत् । जर॑तोःऽइव । श॒स्य॒ते॒ । अन्ति॑ । सत् । भू॒तु॒ । वा॒म् । अवः॑ ॥ ८.७३.११
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:73» मन्त्र:11
| अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:20» मन्त्र:1
| मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:11
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे अश्विद्वय राजा और अमात्य ! आप दोनों (वल्गु) मनोहर सुवचन (वदते) बोलते (अत्रये) मातापितृभ्रातृविहीन शिशुसमुदाय को (आतपः) तपानेवाले भूख प्यास आदि (अग्निम्) ज्वाला को (वरेथे) निवारण कीजिये। आपके राज्य में यह महान् कार्य साधनीय है ॥८॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'प्राणापान का विलक्षण रक्षण'
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्राणापानो! (वाम्) = आपका (इदं) = यह रक्षण (पुराणवत्) = उस पुराणपुरुष के रक्षण की तरह (किम्) = क्या ही विलक्षण है? आपका यह रक्षण उसी प्रकार (शस्यते) = स्तुति किया जाता है, (इव) = जैसे (जरतो:) = उस वृद्ध-पुराणपुरुष प्रभु का रक्षण प्रशंसित होता है। प्रभु का रक्षण अद्भुत है। प्राणापानों का रक्षण भी कम अद्भुत नहीं । वस्तुतः प्रभु प्राणापान के द्वारा ही तो हमारा रक्षण करते हैं। [२] (वाम् अवः) = आपका रक्षण (सत्) = उत्तम है। वह हमें (अन्ति भूतु) = समीपता से प्राप्त हो ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - प्राणापान का रक्षण प्रभु के रक्षण की तरह अद्भुत है। यह रक्षण हमें प्राप्त हो ।
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे अश्विनौ=राजामात्यौ ! युवाम्। वल्गु=मनोहारि सुवचनम्। वदते=सुभाषमाणाय। अत्रये=सर्वपरित्यक्ताय मातापितृभ्रातृविहीनाय शिशवे। आतपः=आतपयन्तं क्षुधादिरूपमग्निम्। वरेथे=निवारयतम्। इतं युवाभ्यां राज्ये महत्कार्य्यं साधनीयमस्ति ॥८॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - What sort of talk is this going round about you in the old outmoded style that you are nothing more than growing in years? O youthful harbingers of new light and freshness, let your protections and inspirations be with us at the closest and newest.
