उदी॑राथामृताय॒ते यु॒ञ्जाथा॑मश्विना॒ रथ॑म् । अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
ud īrāthām ṛtāyate yuñjāthām aśvinā ratham | anti ṣad bhūtu vām avaḥ ||
पद पाठ
उत् । ई॒रा॒था॒म् । ऋ॒त॒ऽय॒ते । यु॒ञ्जाथा॑म् । अ॒श्वि॒ना॒ । रथ॑म् । अन्ति॑ । सत् । भू॒तु॒ । वा॒म् । अवः॑ ॥ ८.७३.१
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:73» मन्त्र:1
| अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:18» मन्त्र:1
| मण्डल:8» अनुवाक:8» मन्त्र:1
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
उदीरावाम ऋतायते
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अश्विना) = प्राणापानो! (ऋतायते) = ऋत की कामनावाले पुरुष के लिए सब बातें युक्त रूप में करनेवाले पुरुष के लिए (उद् ईराथाम्) = उत्कृष्ट गतिवाले होओ। प्राणसाधना ऋतायन् पुरुष के लिए युक्ताहार-विहारवाले पुरुष के लिए सब कर्मों में युक्तचेष्ट पुरुष के लिए उत्कर्ष को प्राप्त कराती है। हे प्राणापानो! आप (रथम्) = इस शरीररथ को (युञ्जाथाम्) = उत्कृष्ट इन्द्रियाश्वों से युक्त करो । ('प्राणायामैर्दहेद्दोषान्') = प्राणायामों से इन्द्रियों के दोष दग्ध हो जाते हैं और उत्तम इन्द्रियाश्व शरीररथ को लक्ष्य की ओर ले चलनेवाले होते हैं। [२] हे प्राणापानो! (वाम्) = आपका (अवः) = रक्षण (सत्) = उत्तम है यह सदा (अन्ति भूतु) = हमें समीपता से प्राप्त हो। हम सदा प्राणसाधना में प्रवृत्त हुए- हुए शरीर का पालन [ रोगों से बचाव ] तथा मन का पूरण [ वासनाओं से अनाक्रान्तत्व] कर सकें।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - ऋत की कामनावाला पुरुष प्राणसाधना से शरीररथ को उत्तम इन्द्रियाश्वों से युक्त करके उत्कर्ष की ओर ले चलता है। प्राणापानों का रक्षण उत्तम हैं।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O Ashvins, harbingers of the new dawn of light and energy, arise for the man of simple straight paths of rectitude, harness your chariot and come. May your power and protection be close to us for us.
