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देवता: इन्द्र: ऋषि: प्रियमेधः छन्द: गायत्री स्वर: षड्जः

इन्द्रा॑य॒ गाव॑ आ॒शिरं॑ दुदु॒ह्रे व॒ज्रिणे॒ मधु॑ । यत्सी॑मुपह्व॒रे वि॒दत् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

indrāya gāva āśiraṁ duduhre vajriṇe madhu | yat sīm upahvare vidat ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

इन्द्रा॑य । गावः॑ । आ॒ऽशिर॑म् । दु॒दु॒ह्रे । व॒ज्रिणे॑ । मधु॑ । यत् । सी॒म् । उ॒प॒ऽह्व॒रे । वि॒दत् ॥ ८.६९.६

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:69» मन्त्र:6 | अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:6» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:7» मन्त्र:6


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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - (अस्य) इस सर्वत्र प्रसिद्ध (दिवः) परमात्मदेव के (त्रिषु+आरोचने) तीनों प्रकाशमान पृथिव्यादि लोकों में जो (देवानाम्+जन्मन्) समस्त पदार्थों की जन्मकारण (विशः) प्रजाएँ हैं, (ताः) वे सब ही (पृश्नयः) गौवों के समान (सोमम्+श्रीणन्ति) मधुर-मधुर पदार्थ दे रही हैं। कैसी गाएँ (सूददोहसः) कूप के समान थनवाली ॥३॥
भावार्थभाषाः - जैसे गाएँ मधुर दूध देती हैं, वैसे ही सब पदार्थ मधुरता उत्पन्न कर रहे हैं। इसको देखिये और विचारिये ॥३॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

आशिरं मधु

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (इन्द्राय) = जितेन्द्रिय (वज्रिणे) = क्रियाशीलतारूप वज्र को हाथ में लिये हुए पुरुष के लिए (गावः) = वेदवाणीरूप गौवें (आशिरं) = समन्तात् काम-क्रोध आदि शत्रुओं को शीर्ण करनेवाले (मधु) = मधुर ज्ञान को जीवन को मधुर बनानेवाले आत्मज्ञान को (दुदुह्ने) = प्रपूरित करती हैं। [२] उस ज्ञान को जिसको (सीम्) = निश्चय से (उपह्वरे) = हृदय के एकान्त देश में (यत्) = ये वेदवाणियाँ प्राप्त कराती हैं, (विदत्) = यह उपासक प्राप्त करता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम जितेन्द्रिय व क्रियाशील बनकर वेदधेनु से ज्ञानदुग्ध का दोहन करें। यह हृदय के एकान्त देश में प्राप्त होनेवाला ज्ञान हमारे जीवन को मधुर बनाएगा। यह सब वासनाओं को विनष्ट करेगा।
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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - अस्य=सर्वत्र प्रसिद्धस्य। दिवः=प्रकाशमानस्येश्वरस्य। त्रिषु+आरोचने=आरोचनेषु=आरोचमानेषु पृथिव्यादि- स्थानेषु। देवानां=सकलपदार्थानाम्। जन्मन्=जन्मनि। याः कारणभूता विशः प्रजाः सन्ति। ताः+ सूददोहसः=कूपदोहनाः। पृश्नयः=गाव इव सोमं श्रीणन्ति। सूद इति कूपनाम ॥३॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Lands and cows, suns and planets, indeed all objects in motion, exude for Indra, wielder of thunder, the ichor of emotional adoration seasoned with ecstasy like honey sweet milk mixed with soma which he receives close at hand and cherishes.