आ हर॑यः ससृज्रि॒रेऽरु॑षी॒रधि॑ ब॒र्हिषि॑ । यत्रा॒भि सं॒नवा॑महे ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
ā harayaḥ sasṛjrire ruṣīr adhi barhiṣi | yatrābhi saṁnavāmahe ||
पद पाठ
आ । हर॑यः । स॒सृ॒ज्रि॒रे॒ । अरु॑षीः । अधि॑ । ब॒र्हिषि॑ । यत्र॑ । अ॒भि । स॒म्ऽनवा॑महे ॥ ८.६९.५
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:69» मन्त्र:5
| अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:5» मन्त्र:5
| मण्डल:8» अनुवाक:7» मन्त्र:5
0 बार पढ़ा गया
शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे मनुष्यों ! तुम उस ईश्वर को प्रसन्न करने के लिये इच्छा करो। जो देव (वः+ओदतीनाम्) तुम्हारी सम्पत्तियों का रक्षक है और (योयुवतीनाम्) परम सुन्दरी स्त्रियों का (नदम्) पालक है और जो (वः) तुम्हारी (अघ्न्यानाम्) अहन्तव्य (धेनूनाम्) दुग्धवती गौवों का (पतिम्) पति है, उस परमदेव की आज्ञा पर चलो ॥२॥
भावार्थभाषाः - इस ऋचा में ओदती, योयुवती और धेनु ये तीनों स्त्रीलिङ्ग शब्द हैं। इससे दिखलाते हैं कि जैसे स्त्रीजाति का रक्षक ईश्वर है, वैसे ही प्रत्येक वीर पुरुष को उचित है कि वे स्त्रियों पर कभी अत्याचार न करें ॥२॥
0 बार पढ़ा गया
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
अरुषी: हरयः
पदार्थान्वयभाषाः - (यत्र) = जहाँ (बर्हिषि अधि) = हृदयक्षेत्र में स्थित हुए हुए (अभिसन्नवामहे) = प्रातः-सायं [अभि- दिन के दोनों ओर] प्रभु का स्मरण करते हैं तो (हरयः) = इन्द्रियाश्व (आ अरुषीः) = समन्तात् आरोचमान-निर्मल (ससृज्रिरे) = बनाए जाते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभुस्मरण हमारी इन्द्रियों को आरोचमान व निर्मल बनाता है।
0 बार पढ़ा गया
शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे मनुष्याः ! यूयम्। तमीशम्। प्रसादयितुम्। इषुध्यसि=इच्छत कामयध्वम्। कीदृशम्। वः=युष्माकम्। ओदतीनाम्=सम्पत्तीनाम्। नदम्=रक्षितारम्। पुनः। वो युष्माकम्। योयुवतीनाम्=परमसुन्दरीणाञ्च। नदम्। पुनः। वो=युष्माकम्=अघ्न्यानां=अहन्तव्यानाम्। धेनूनाञ्च पतिम् ॥२॥
0 बार पढ़ा गया
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Let the vibrations of divinity, like crimson rays of dawn which bring the sun to the earth, bring Indra on to our sacred grass where we humans meet and pray and celebrate the lord in song together.
