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त्वोता॑स॒स्त्वा यु॒जाप्सु सूर्ये॑ म॒हद्धन॑म् । जये॑म पृ॒त्सु व॑ज्रिवः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tvotāsas tvā yujāpsu sūrye mahad dhanam | jayema pṛtsu vajrivaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

त्वाऽऊ॑तासः । त्वा । यु॒जा । अ॒प्ऽसु । सूर्ये॑ । म॒हत् । धन॑म् । जये॑म । पृ॒त्ऽसु । व॒ज्रि॒ऽवः॒ ॥ ८.६८.९

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:68» मन्त्र:9 | अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:2» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:7» मन्त्र:9


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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे विवेकी पुरुषो ! मैं (इन्द्रम्) उस परमैश्वर्य्यशाली ईश्वर की स्तुति प्रार्थना और गान करता हूँ, तुम भी करो, जो (परोमात्रम्) अतिशय पर है अर्थात् जो परिमित है तथापि (ऋचीसमम्) ऋचा के सम है। भाव यह है−यद्यपि वह परमात्मा अपरिछिन्न है, तथापि हम मनुष्य उसकी स्तुति प्रार्थना करते हैं, अतः मानो वह ऋचा के बराबर है। ऋचा जहाँ तक पहुँचती है, वहाँ तक है। पुनः (उग्रम्) महाबलिष्ठ और भयङ्कर है, (सुराधसम्) सुशोभन धनसम्पन्न है और (वसूनाम्+चित्) धनों वासों का (ईशानम्) शासक भी है ॥६॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा अनन्त-अनन्त है, तथापि जीवों पर दया करनेवाला भी है, अतः वह उपास्य है ॥६॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

अप्सु सूर्ये

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (वज्रिवः) = क्रियाशीलतारूप वज्र [वज गतौ] को हाथ में लिये हुए प्रभो ! (त्वा ऊतासः) = आपके द्वारा रक्षित हुए हुए हम (त्वायुजा) = आप साथी के साथ (अप्सु) = रेत: कणरूप जलों के सुरक्षित होने पर अथवा कर्मों के होने पर और (सूर्ये) = ज्ञानसूर्य का उदय होने पर (पृत्सु) = संग्रामों में (महद्धनम्) = महान् धन को (जयेम) = जीतनेवाले हों। [२] प्रभु का अनुग्रह प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि हम क्रियाशील हों और ज्ञान का खूब संचय करें। ऐसी स्थिति में ही हम वासनाओं को संग्राम में जीत पाएँगें और महान् धन का विजय करेंगे।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हे इन्द्र ! तुझ से रक्षित होकर हम तेरी सहायता प्राप्त करके यज्ञ कर्मों को करें तथा संग्रामों में बहुत सारे धन को जीतें ।
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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - इन्द्रं हुवे इति शेषः। कीदृशम्=परोमात्रम्=अतिशयेन परम्=सर्वेभ्यः परम् अपरिछिन्नम्=तथापि। ऋचीसमम्। ऋग्भिः समम्=स्तुत्यापरिछिन्नम्। पुनः। उग्रम्= महाबलिष्ठम्। सुराधसम्=सर्वधनसम्पन्नम्। वसूनां= धनानां वासानां च। ईशानं+चित्=शासकमपि ॥६॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O lord of thunderous energy and power, protected by you and in close association with you, we pray, we may discover great wealth in the waters and in the sun and win far reaching victories in our battles of life.