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तंत॒मिद्राध॑से म॒ह इन्द्रं॑ चोदामि पी॒तये॑ । यः पू॒र्व्यामनु॑ष्टुति॒मीशे॑ कृष्टी॒नां नृ॒तुः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

taṁ-tam id rādhase maha indraṁ codāmi pītaye | yaḥ pūrvyām anuṣṭutim īśe kṛṣṭīnāṁ nṛtuḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

तम्ऽत॑म् । इत् । राध॑से । म॒हे । इन्द्र॑म् । चो॒दा॒मि॒ । पी॒तये॑ । यः । पू॒र्व्याम् । अनु॑ऽस्तुतिम् । ईशे॑ । कृ॒ष्टी॒नाम् । नृ॒तुः ॥ ८.६८.७

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:68» मन्त्र:7 | अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:2» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:7» मन्त्र:7


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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे मनुष्यों ! (वः+पतिम्) आप मनुष्यों के पालक परमदेव को (चर्षणीनाम्) प्रजाओं और (रथानाम्) रथस्वरूप इन जगत्प्राणियों की (एवैः) स्वेच्छापूर्वक (ऊती) रक्षा, साहाय्य और कृपा करने के लिये (हुवे) शुभकर्मों में स्तुति करता हूँ। अपने हृदय में ध्यान करता और आवश्यकताएँ माँगता हूँ। जो परमात्मा (विश्वानरस्य) समस्त नरसमाज का पति है और (अनानतस्य) सूर्य्यादि लोकों और (शवसः) उनकी शक्तियों का भी शासकदेव है ॥४॥
भावार्थभाषाः - जिस कारण वह सबका पालक, शासक और अनुग्राहक है और सर्वशक्तिमान् है, अतः जगत् के कल्याण के लिये उसी की मैं उपासना करता हूँ ॥४॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

महे राधसे-पीतये

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (तं तं इन्द्रं इत्) = उसको और उस सर्वशक्तिमान् प्रभु को ही (महे राधसे) = महान् ऐश्वर्य के लिए तथा (पीतये) = अपने अन्दर सोम के रक्षण के लिए (चोदामि) = प्रेरित करता हूँ। हृदय में प्रभु का ही स्मरण करता हूँ। यह स्मरण हमें ऐश्वर्यशाली बनाता है और सोमरक्षण के योग्य करता है। [२] मैं उस प्रभु को अपने अन्दर प्रेरित करता हूँ (यः) = जो (पूर्व्याम्) = सर्वश्रेष्ठ (अनुष्टुतिं) = अनुदिन की जानेवाली स्तुति के (ईशे) = ईश हैं तथा (कृष्टीनाम्) = श्रमशील मनुष्यों के (नृतुः) = उत्कृष्ट कर्मफलों को प्राप्त करानेवाले हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु का हृदय में धारण हमें महान् ऐश्वर्य को प्राप्त कराएगा और हमारे में सोम का रक्षण करेगा। ये प्रभु ही श्रमशील व्यक्तियों को उस उस कर्मफल को प्राप्त कराते हैं।
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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे मनुष्याः ! विश्वानरस्य=सर्वेषां नराणाम्। अनानतस्य=अनम्रीभूतस्य=सूर्य्यादेः। शवसः=बलस्य च। तथा। वः=युष्माकम्। पतिम्। एवैः=स्वेच्छाभिः। चर्षणीनाम्=प्रजानां रथानाञ्च। ऊती=ऊत्यै। हुवे ॥४॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - For every great success, for all wealth and high competence in life and also for the joyous pleasure of it all, I invoke and celebrate Indra, ultimate leader and guide of the people who listens to the prayers and adorations of humanity since time immemorial and rules them all.