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तं त्वा॑ य॒ज्ञेभि॑रीमहे॒ तं गी॒र्भिर्गि॑र्वणस्तम । इन्द्र॒ यथा॑ चि॒दावि॑थ॒ वाजे॑षु पुरु॒माय्य॑म् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

taṁ tvā yajñebhir īmahe taṁ gīrbhir girvaṇastama | indra yathā cid āvitha vājeṣu purumāyyam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

तम् । त्वा॒ । य॒ज्ञेभिः॑ । ई॒म॒हे॒ । तम् । गीः॒ऽभिः । गि॒र्व॒णः॒ऽत॒म॒ । इन्द्र॑ । यथा॑ । चि॒त् । आवि॑थ । वाजे॑षु । पु॒रु॒ऽमाय्य॑म् ॥ ८.६८.१०

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:68» मन्त्र:10 | अष्टक:6» अध्याय:5» वर्ग:2» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:7» मन्त्र:10


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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - मैं उपासक (पीतये) कृपादृष्टि से अवलोकनार्थ और (महः+राधसे) महान् पूज्य सर्व प्रकार के धनों की प्राप्ति के लिये (तम्+तम्+इत्+इन्द्रम्) उसी इन्द्रवाच्य जगदीश की (चोदामि) स्तुति करता हूँ। उस परमदेव को छोड़ अन्य की स्तुति नहीं करता, जो (पूर्व्याम्+अनुष्टुतिम्) प्राचीन और नवीन अनुकूल स्तुति को सुनता हूँ और जो (कृष्टीनाम्) समस्त प्रजाओं का (ईशे) शासक स्वामी है और (नृतुः) जो सबका नायक है ॥७॥
भावार्थभाषाः - हे मनुष्यों ! उसी की कीर्ति गाओ, जो सबका स्वामी है। वह इन्द्र नामधारी जगदीश है ॥७॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

यज्ञेभिः=गीर्भिः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (गिर्वणस्तम) = ज्ञान की वाणियों से अधिक-से-अधिक संभजनीय प्रभो ! (तं त्वा) = उन आपको हम (यज्ञेभिः) = यज्ञों के द्वारा तथा (गीर्भिः) = ज्ञान की वाणियों के द्वारा (ईमहे) = याचना करते हैं। यज्ञों व ज्ञानवाणियों के द्वारा आपकी उपासना करते हैं। [२] हे (इन्द्र) = शत्रुओं के विद्रावक प्रभो ! आप (पुरुमाय्यम्) = [बहुप्रज्ञं बहुस्तुतिं वा ] बहुत प्रज्ञावाले व स्तुतिवाले उपासक को (वाजेषु) = संग्रामों में (यथाचिद्) = जिस प्रकार से निश्चयपूर्वक आविथ रक्षित करते हैं। यह 'पुरुमाय्य' आपकी रक्षा को प्राप्त करता ही है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम यज्ञों व ज्ञान की वाणियों द्वारा प्रभु का उपासन करें। प्रभु संग्रामों में हमारा रक्षण करेंगे।
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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - अहमुपासकः। पीतये=कृपादृष्ट्यावलोकनाय। महः=महते। राधसे=सर्वप्रकारकधनप्राप्तये च। तं तमित्=तं तमेवेन्द्रम्। चोदामि=स्तुतिं प्रेरयामि=स्तौमीत्यर्थः। पूर्व्याम्=पुराणीम्=नवीनाञ्च। अनुस्तुतिम्=अनुकूलां स्तुतिम्। शृणोति। यश्च। कृष्टीनाम्=प्रजानाञ्च। ईशे=ईशिताऽस्ति। यश्च नृतुः=नायकोऽस्ति ॥७॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, lord most adorable, we honour you by yajnas of corporate research and development, and we adore you in many languages as you guide, advance and protect the man of knowledge in our human endeavours for new achievements and further advances.