देवता: आदित्याः
ऋषि: मत्स्यः साम्मदो मान्यो वा मैत्रावरुणिर्बहवो वा मत्स्या जालनध्दाः
छन्द: निचृद्गायत्री
स्वर: षड्जः
तेषां॒ हि चि॒त्रमु॒क्थ्यं१॒॑ वरू॑थ॒मस्ति॑ दा॒शुषे॑ । आ॒दि॒त्याना॑मरं॒कृते॑ ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
teṣāṁ hi citram ukthyaṁ varūtham asti dāśuṣe | ādityānām araṁkṛte ||
पद पाठ
तेषा॑म् । हि । चि॒त्रम् । उ॒क्थ्य॑म् । वरू॑थम् । अस्ति॑ । दा॒शुषे॑ । आ॒दि॒त्याना॑म् । अ॒र॒म्ऽकृते॑ ॥ ८.६७.३
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:67» मन्त्र:3
| अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:51» मन्त्र:3
| मण्डल:8» अनुवाक:7» मन्त्र:3
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - (कलयः) हे कलाविदों यद्वा हे शुभकर्मकर्त्तारो ! (वः) तुम्हारे गृहों में (सोमः) प्रिय रसमय और मधुर पदार्थ और सोमयज्ञ (सुतः+इत्) सम्पादित होवे। (मा+बिभीतन) तुम मत डरो, क्योंकि ईश्वर की कृपा से (एषः+ध्वस्मा) यह ध्वंसक शोक मोह आदि (अपायति+इत्) जा रहे हैं (एषः) यह (स्वयम्+घ) स्वयं ही (अपायति) दूर भाग रहा है ॥१५॥
भावार्थभाषाः - हे मनुष्यों ! तुम सदा शुभकर्म करो, जिनसे तुम्हारे सर्व भय दूर हो जाएँगे और शोक मोह आदि क्लेश भी प्राप्त न होंगे ॥१५॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
चित्रं उक्थ्यं 'वरूथम्'
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (तेषां) = उन (आदित्यानां) = ज्ञान व गुणों का आदान करनेवालों का (दाशुषे) = दाश्वान् पुरुष के लिए अपना अर्पण करनेवाले मनुष्य के लिए तथा (अरङ्कृते) = खूब क्रियाशीलता द्वारा अपने जीवन को अलंकृत करनेवाले पुरुष के लिए (हि) = निश्चय से (चित्रं) = अद्भुत (उक्थ्यं) = प्रशंसनीय (वरूथम्) = धन (अस्ति) = है। [२] ये आदित्य इन दाश्वान् अरङ्कृत पुरुषों को अद्भुत प्रशंसनीय धन प्राप्त कराते हैं। जो विद्यार्थी आचार्य के प्रति अपना अर्पण कर देता है व पुरुषार्थवाला होता है, वह उत्कृष्ट ज्ञान धन को प्राप्त करता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम उत्कृष्ट ज्ञानियों के सम्पर्क में पुरुषार्थशील होते हुए ऊँचे-से-ऊँचे ज्ञान को प्राप्त करें।
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे कलयः=हे कलाविदः ! यद्वा हे कर्तारः कर्मणाम् ! वः=युष्माकं गृहे। सोमः=प्रियो मधुरश्च पदार्थः। सुतः+इत्=सम्पादितोऽस्तु। मा बिभीतन=भीता मा भवत। यतः एषः+ध्वस्मा=ध्वंसकः। शोकादि अपायति+इत्=अपगच्छत्येव। एषः। स्वयं+घ=स्वयमेव। अपायति ॥१५॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Ample means and materials, wonderful, various and admirable, vest in the brilliant Adityas, enlightened powers of governance and administration, for the people of generosity, and beauty, decency and grace.
