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नास्माक॑मस्ति॒ तत्तर॒ आदि॑त्यासो अति॒ष्कदे॑ । यू॒यम॒स्मभ्यं॑ मृळत ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

nāsmākam asti tat tara ādityāso atiṣkade | yūyam asmabhyam mṛḻata ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

न । अ॒स्माक॑म् । अ॒स्ति॒ । तत् । तरः॑ । आदि॑त्यासः । अ॒ति॒ऽस्कदे॑ । यू॒यम् । अ॒स्मभ्य॑म् । मृ॒ळ॒त॒ ॥ ८.६७.१९

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:67» मन्त्र:19 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:54» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:7» मन्त्र:19


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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - (सुदानवः+आदित्याः) हे परमोदार परमदानी सभासदों ! (वः+ऊतिभिः) आप लोगों की रक्षा, साहाय्य और राज्यप्रबन्ध से (वयम्+हि) हम प्रजागण (शश्वत्) सर्वदा (पुरा) पूर्वकाल में और (नूनम्) इस वर्तमान समय में (बुभुज्महे) आनन्द भोग विलास करते आए हैं और कर रहे हैं, अतः आप लोग धन्यवाद के पात्र हैं ॥१६॥
भावार्थभाषाः - राज्य-कर्मचारियों का अच्छे काम होने पर अभिनन्दन करें ॥१६॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

तत् तर:

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (आदित्यासः) = हे आदित्य विद्वानो ! (अस्माकं) = हमारा (तत्) = वह (तरः) = वेग व बल (न अस्ति) = नहीं है, जो (अतिष्कदे) = विषयों के बन्धन को लाँघने में समर्थ हो, अर्थात् हम स्वयं विषयासक्ति से ऊपर उठ जाएँगे, सो बात नहीं हैं। [२] हे आदित्यो ! (यूयं) = आप ही (अस्मभ्यं मृडत) = हमारे लिए सुख को देनेवाले होओ। आपकी कृपा होगी तभी हम ज्ञान को प्राप्त करके इस वासनाजाल से मुक्त हो सकेंगे।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- आदित्य विद्वानों का सम्पर्क हमें उस ज्ञान के बल को प्राप्त कराएगा जो हमें वासनाजाल को तैरने में समर्थ करके सुखी करेगा।
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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - (सुदानवः+आदित्याः) हे परमोदाराः सभासदः ! वः=युष्माकम्। ऊतिभिः=रक्षणैः साहाय्यैः प्रबन्धैश्च। वयं हि। शश्वद्=सर्वदा। पुरा=पूर्वस्मिन् काले। नूनमिदानीञ्च। बुभुज्महे=भुञ्ज्महे=भुक्तवन्तश्च ॥१६॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O Adityas, leaders of the human nation, that power and competence you give us to get over our problems is not our own, it is yours. Pray be kind and gracious and keep it up as ever before.