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ये मू॒र्धान॑: क्षिती॒नामद॑ब्धास॒: स्वय॑शसः । व्र॒ता रक्ष॑न्ते अ॒द्रुह॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ye mūrdhānaḥ kṣitīnām adabdhāsaḥ svayaśasaḥ | vratā rakṣante adruhaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

ये । मू॒र्धानः॑ । क्षि॒ती॒नाम् । अद॑ब्धासः । स्वऽय॑शसः । व्र॒ता । रक्ष॑न्ते । अ॒द्रुहः॑ ॥ ८.६७.१३

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:67» मन्त्र:13 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:53» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:7» मन्त्र:13


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शिव शंकर शर्मा

यहाँ सभा को संबोधित करते हैं।

पदार्थान्वयभाषाः - (महि) हे पूज्य (देवि) हे देवि (अदिते) अदीने सभे ! (उत) और सभास्थ पुरुषो (अभिष्टये) अभिमत फलप्राप्ति के लिये (अहम्) मैं (सुमृळीकाम्) सुखदात्री (त्वा) तेरे निकट भी (उप+ब्रुवे) प्रार्थना करता हूँ ॥१०॥
भावार्थभाषाः - अदिति=यह राज्यसम्बन्धी प्रकरण है और मित्र वरुण और अर्य्यमा आदि प्रतिनिधियों का वर्णन है, अतः यहाँ अदिति शब्द से सभा का ग्रहण है। यह भी एक वैदिक शैली है कि सभा को सम्बोधित करके प्रजागण अपनी प्रार्थना सुनावें ॥१०॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

क्षितीनां मूर्धानः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] गतमन्त्र के अनुसार गतिशील व उपासक लोग वे होते हैं ये जो क्षितीनां मूर्धान:- मनुष्यों के शिरोमणि बनते हैं। अदब्धासः = ये वासनाओं से हिंसित नहीं होते । स्वयशसा - अपने उत्तम कर्मों के कारण यशस्वी होते हैं। [२] ये व्रता रक्षन्ते व्रतों का पालन करते हैं और अद्रुहः- किसी का द्रोह नहीं करते।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- पुरुषोत्तम वह है जो [१] वासनाओं से आक्रान्त नहीं होता [२] यशस्वी कर्मोंवाला है, [३] व्रतमय जीवनवाला, तथा [४] द्रोहशून्य है।
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शिव शंकर शर्मा

अत्र सभा सम्बोध्यते।

पदार्थान्वयभाषाः - हे महि=महति ! हे देवि अदिते=अदीने सभे ! उत=अपि च। अभिष्टये=अभिमतफलप्राप्त्यै। सुमृळीकाम्=सुखयित्रीम्। त्वा=त्वाम् अपि अहमुपब्रुवे ॥१०॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Those who are on top of the average people, active, bold, unbending, and gifted with innate honour and reputation in law and personal values of virtue, free from jealousy and enmity, they maintain, uphold and protect the laws, values and commitments of the land. (They are the chosen children of mother earth, Adityas, worthy of being members of the mother’s household, council of the nation.)