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सु॒ताव॑न्तस्त्वा व॒यं प्रय॑स्वन्तो हवामहे । इ॒दं नो॑ ब॒र्हिरा॒सदे॑ ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

sutāvantas tvā vayam prayasvanto havāmahe | idaṁ no barhir āsade ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

सु॒तऽव॑न्तः । त्वा॒ । व॒यम् । प्रय॑स्वन्तः । ह॒वा॒म॒हे॒ । इ॒दम् । नः॒ । ब॒र्हिः । आ॒ऽसदे॑ ॥ ८.६५.६

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:65» मन्त्र:6 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:46» मन्त्र:6 | मण्डल:8» अनुवाक:7» मन्त्र:6


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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे इन्द्र ! (सोमस्य+पीतये) इस संसार की रक्षा के लिये (गीर्भिः) विविध स्तोत्रों से (त्वा) तेरा (आ+हुवे) आवाहन और स्तवन करता हूँ, जो तू (महाम्) महान् और (उरुम्) सर्वत्र व्याप्त है। यहाँ दृष्टान्त देते हैं (भोजसे) घास खिलाने के लिये (गाम्+इव) जैसे गौ को बुलाते हैं ॥३॥
भावार्थभाषाः - जो महान् और उरु अर्थात् सर्वत्र विस्तीर्ण है, वह स्वयं संसार की रक्षा में प्रवृत्त है, तथापि प्रेमवश भक्तजन उसका आह्वान और प्रार्थना करते हैं ॥३॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

सुतावन्तः प्रयस्वन्तः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (सुतावन्तः) = उत्पन्न सोम का प्रशस्तरूप में रक्षण करनेवाले (वयं) = हम (त्वा) = हे प्रभो ! आपको (हवामहे) = पुकारते हैं। [२] (प्रयस्वन्तः) = प्रशस्त सात्त्विक भोजनवाले बनकर हम आपको (नः) = हमारे (इदं बर्हिः) = इस वासनामलशून्य हृदयासन पर (आसदे) = बैठने के लिए पुकारते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम सुतावानम् व प्रयस्वान्-सोम का रक्षण करनेवाले व प्रशस्त सात्त्विक भोजन करनेवाले बनकर प्रभु की आराधना करें।
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शिव शंकर शर्मा

पदार्थान्वयभाषाः - हे इन्द्र ! सोमस्य=संसारस्य। पीतये=रक्षणाय। “ईश्वरपक्षे सोमः संसारः सूयते सृज्यत इति सोमः। पीतिः=पानम्=पालनम्। पा रक्षणे”। त्वा=त्वाम्। गीर्भिः=स्तुतिभिः। आ+हुवे=आह्वयामि=स्तौमि। कीदृशम्। महाम्=महान्तम् उरुम्। सर्वत्र विस्तीर्णम्। अत्र दृष्टान्तः। भोजसे=भोगाय गामिव ॥३॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Dedicated to noble acts of yajna and soma creation, bearing havi for yajna and food for yajnic charity, we invoke and invite you to come and be seated on the holy seats of our vedi and bless our heart and soul.