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आ त॑ इन्द्र महि॒मानं॒ हर॑यो देव ते॒ मह॑: । रथे॑ वहन्तु॒ बिभ्र॑तः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ā ta indra mahimānaṁ harayo deva te mahaḥ | rathe vahantu bibhrataḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

आ । ते॒ । इ॒न्द्र॒ । म॒हि॒मान॑म् । हर॑यः । दे॒व॒ । ते॒ । महः॑ । रथे॑ । व॒ह॒न्तु॒ । बिभ्र॑तः ॥ ८.६५.४

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:65» मन्त्र:4 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:46» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:7» मन्त्र:4


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शिव शंकर शर्मा

पुनरपि इन्द्र की प्रार्थना का विधान करते हैं।

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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

महिमा+महस्

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे इन्द्र! सब बल के कर्मों को करनेवाले प्रभो! (ते महिमानं) = आपकी महिमा को (हरयः) = ये ज्ञानेन्द्रियरूप (अश्व आवहन्तु) = प्राप्त कराएँ । हमारी ज्ञानेन्द्रियाँ सर्वत्र आपकी महिमा को देखें। [२] हे (देव) = इस संसाररूप क्रीड़ा के करनेवाले प्रभो! (ते महः) = आपके तेज को (रथे बिभ्रतः) = शरीररूप रथ में धारण करते हुए ये कर्मेन्द्रियरूप अश्व वहन्तु हमें लक्ष्यस्थान पर पहुँचानेवाले हों।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हमारी ज्ञानेन्द्रियाँ सर्वत्र प्रभु की महिमा को देखें और हमारी कर्मेन्द्रियाँ प्रभु की शक्ति का धारण करनेवाली हों।
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शिव शंकर शर्मा

पुनरिन्द्रस्य प्रार्थना विधीयते।

पदार्थान्वयभाषाः - यद्=यद्यपि। हे इन्द्र ! प्राग्=प्राच्याम्। अपाक्=प्रचीत्याम्। उदङ्=उदीच्याम्। न्यक्=नीचैः। वा। नृभिः। त्वं हूयसे। सर्वत्रैव त्वं पूज्यसे। तथापि ममापि गृहम्। आशुभिः=शीघ्रगामिभिः संसारैः सह। तूयं शीघ्रमायाहि ॥१॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, refulgent lord, may your radiating forces of transport and communication bear and bring you here to us with your grandeur and your majesty in the chariot.