कं ते॑ दा॒ना अ॑सक्षत॒ वृत्र॑ह॒न्कं सु॒वीर्या॑ । उ॒क्थे क उ॑ स्वि॒दन्त॑मः ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
kaṁ te dānā asakṣata vṛtrahan kaṁ suvīryā | ukthe ka u svid antamaḥ ||
पद पाठ
कम् । ते॒ । दा॒नाः । अ॒स॒क्ष॒त॒ । वृत्र॑ऽहन् । कम् । सु॒ऽवीर्या॑ । उ॒क्थे । कः । ऊँ॒ इति॑ । स्वि॒त् । अन्त॑मः ॥ ८.६४.९
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:64» मन्त्र:9
| अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:45» मन्त्र:3
| मण्डल:8» अनुवाक:7» मन्त्र:9
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे भगवन् ! (वयम्) हम उपासकगण (उ) निश्चय करके (दिवा) दिन में (सुते) शुभकर्म के समय (त्वा+हवामहे) तेरा आवाहन, प्रार्थना और स्तुति करते हैं और (वयम्+नक्तम्) हम सब रात्रिकाल में भी तेरी स्तुति करते हैं, इस कारण (अस्माकम्) हम लोगों की (कामम्) इच्छा को (आ+पृण) पूर्ण कर ॥६॥
भावार्थभाषाः - जब समय हो, तब ही ईश्वर की प्रार्थना करे और उससे अपना अभीष्ट निवेदन करे ॥६॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
दान-सुवीर्य-उक्थ
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्रभो! (कं) = किसी विरल व्यक्ति को ही (ते दाना) = तेरी दानवृत्तियाँ असक्षत प्राप्त होती हैं, अर्थात् कोई विरल व्यक्ति ही आपकी उपासना करता हुआ दानवृत्तिवाला होता है। हे (वृत्रहन्) = वासनाओं को विनष्ट करनेवाले प्रभो! (कं) = किसी एक आध को ही (सुवीर्या) = उत्तम वीर्य [पराक्रम] प्राप्त होते हैं। [२] (कः उ) = और कोई ही (उक्थे) = स्तोत्रों के होने पर (स्वित्) = निश्चय से (अन्तमः) = आपका अन्तिकतम होता है। ऐसे व्यक्ति कम ही हैं जो आपकी स्तुति करते हुए आपके उपासक बनते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - विरल ही व्यक्ति दानवृत्ति को अपना कर वासनाओं से ऊपर उठकर शक्तिशाली बनते हैं और प्रभुस्तवन करते हुए प्रभु के उपासक बनते हैं।
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे इन्द्र ! दिवा=दिने। नक्तम्=रात्रौ च। सुते=शुभकर्मणि। वयं हि त्वां हवामहे। त्वमस्माकं कामम्। आपृण=आपूरय ॥६॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O destroyer of darkness and evil, whom do your gifts of generosity reach? And whom do your strength and energies reach? In the chant of hymns and in yajna, who is your closest friendliest devotee?
