व॒यमु॑ त्वा॒ दिवा॑ सु॒ते व॒यं नक्तं॑ हवामहे । अ॒स्माकं॒ काम॒मा पृ॑ण ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
vayam u tvā divā sute vayaṁ naktaṁ havāmahe | asmākaṁ kāmam ā pṛṇa ||
पद पाठ
व॒यम् । ऊँ॒ इति॑ । त्वा॒ । दिवा॑ । सु॒ते । व॒यम् । नक्त॑म् । ह॒वा॒म॒हे॒ । अ॒स्माक॑म् । काम॑म् । आ । पृ॒ण॒ ॥ ८.६४.६
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:64» मन्त्र:6
| अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:44» मन्त्र:6
| मण्डल:8» अनुवाक:7» मन्त्र:6
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - (इन्द्र) हे ईश ! (त्वम्) तू (सुतानाम्) शुभकर्मों में निरत जनों का (ईशिषे) स्वामी है और (असुतानाम्) कुकर्मियों और अकर्मियों का भी (त्वम्) तू स्वामी है। न केवल इनका ही, किन्तु (जनानाम्+त्वम्+राजा) सर्वजनों का तू ही राजा है ॥३॥
भावार्थभाषाः - ईश्वर को कोई माने या न माने, उसकी प्रार्थना कोई करे या न करे, किन्तु वह सबका शासन राजवत् करता है। कर्मानुसार अनुग्रह और निग्रह करता है, अतः वही सर्वथा पूज्यतम है ॥३॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
प्रभुस्मरण से सोमरक्षण
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्रभो ! (वयम्) = हम (उ) = निश्चय से (त्वा) = आपको (सुते) = शरीर में सोम का सम्पादन करने पर (दिवा) = दिन में (हवामहे) = पुकारते हैं। (नक्तं) = रात में भी वयं हम आपका आह्वान करते हैं। आपका आराधन ही वस्तुतः हमें सोमरक्षण के योग्य बनाता है। [२] (अस्माकं कामं आपृण) = आप हमारी कामना को पूर्ण करिये।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभुस्मरण करते हुए हम सोम का रक्षण करें। इस प्रकार सब उन्नतियों को सिद्ध कर पाएँ।
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शिव शंकर शर्मा
पदार्थान्वयभाषाः - हे इन्द्र ! त्वम्। सुतानाम्=शुभकर्मरतानाम्। असुतानाम्=अशुभकर्मिणां यज्वनाञ्च। त्वमीशिषे। स्वामी वर्तसे। ननु सर्वेषां जनानां त्वं राजासि ॥३॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - We singers, celebrants and yajakas, invoke and invite you in our soma yajna in the day and in the night and pray fulfil our prayer and desire for humanity and divinity.
