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स॒त्यं तदि॑न्द्रावरुणा कृ॒शस्य॑ वां॒ मध्व॑ ऊ॒र्मिं दु॑हते स॒प्त वाणी॑: । ताभि॑र्दा॒श्वांस॑मवतं शुभस्पती॒ यो वा॒मद॑ब्धो अ॒भि पाति॒ चित्ति॑भिः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

satyaṁ tad indrāvaruṇā kṛśasya vām madhva ūrmiṁ duhate sapta vāṇīḥ | tābhir dāśvāṁsam avataṁ śubhas patī yo vām adabdho abhi pāti cittibhiḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

स॒त्यम् । तत् । इ॒न्द्रा॒व॒रु॒णा॒ । कृ॒शस्य॑ । वा॒म् । मध्वः॑ । ऊ॒र्मिम् । दु॒ह॒ते॒ । स॒प्त । वाणीः॑ । ताभिः॑ । दा॒श्वांस॑म् । अ॒व॒त॒म् । शु॒भः॒ । प॒ती॒ इति॑ । यः । वा॒म् । अद॑ब्धः । अ॒भि । पाति॑ । चित्ति॑ऽभिः ॥ ८.५९.३

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:59» मन्त्र:3 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:30» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:3


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

[१] हे (इन्द्रावरुणा) = जितेन्द्रियता व निर्देषता के भावो ! (सत्यं तत्) = वह सत्य है कि (वां) = आपके (कृशस्य) = तपः कृश व्यक्ति के जीवन में (सप्त वाणी:) = सात छन्दोमयी सात वेदवाणियाँ (मध्वः ऊर्मि) = सोम की तरंग को अथवा सोमरक्षणजनित उल्लास को दुहते पूरित करती हैं। जो व्यक्ति जितेन्द्रियता व निर्देषता की साधना करता है वह तपःकृश बनता है। यह वेदवाणियों का स्वाध्याय करता हुआ सोम का रक्षण करता है और सोमरक्षणजनित उल्लास को प्राप्त करता है। [२] हे (शुभस्पती) = शुभ कल्याणमार्ग के पालक इन्द्र और वरुण ! आप (ताभिः) = उन वेदवाणियों के द्वारा उस (दाश्वांसं) = आपके प्रति अपना अर्पण करनेवाले पुरुष को (अवतम्) = रक्षित करो। उस दाश्वान् को, (यः) = जो (अदब्धः) = वासनाओं से हिंसित न होता हुआ (चित्तिभिः) = ज्ञानों के द्वारा (वाम्) = आपका-जितेन्द्रियता व निर्देषता का (अभिपति) = रक्षण करता है।

पदार्थान्वयभाषाः - भावार्थ- हम जितेन्द्रियता व निद्वेषता की साधना करते हुए तपःकृश बनें। स्वाध्याय करते हुए हम सोम का रक्षण करें।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra and Varuna, symbolic powers of love, judgement and social cohesion, true it is that for you the sevenfold voices of the dedicated sage distil the honey sweet vibrations of divine energy in your service and with these you, protectors and promoters of the good and auspiciousness of life, strengthen and advance the generous yajaka who, with sincere thoughts and actions, without fear, serves and augments you with devotion and resolution.