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यु॒वं दे॑वा॒ क्रतु॑ना पू॒र्व्येण॑ यु॒क्ता रथे॑न तवि॒षं य॑जत्रा । आग॑च्छतं नासत्या॒ शची॑भिरि॒दं तृ॒तीयं॒ सव॑नं पिबाथः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yuvaṁ devā kratunā pūrvyeṇa yuktā rathena taviṣaṁ yajatrā | āgacchataṁ nāsatyā śacībhir idaṁ tṛtīyaṁ savanam pibāthaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यु॒वम् । दे॒वा॒ । क्रतु॑ना । पू॒र्व्येण॑ । यु॒क्ताः । रथे॑न । त॒वि॒षम् । य॒ज॒त्रा॒ । आ । अ॒ग॒च्छ॒त॒म् । ना॒स॒त्या॒ । शची॑भिः । इ॒दम् । तृ॒तीय॑म् । सव॑नम् । पि॒बा॒थः॒ ॥ ८.५७.१

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:57» मन्त्र:1 | अष्टक:6» अध्याय:4» वर्ग:28» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:6» मन्त्र:1


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

क्रतुना - शचीभिः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे देवा रोगों व वासनाओं को जीतने की कामनावाले [दिव् विजिगीषायां] (यजत्रा) = संगतिकरण द्वारा रक्षण करनेवाले अथवा पूजा के योग्य (नासत्या) = सब असत्यों को = दूर करनेवाले प्राणापानो ! (युवं) = आप (क्रतुना) = प्रज्ञान व शक्ति के साथ तथा (पूर्व्येण) = पालन व पूरण करनेवालों में उत्तम रथेन शरीररथ के साथ (तविषं) = बलपूर्वक (आगच्छतम्) = हमें प्राप्त होओ। [२] हे प्राणापानो! आप (शचीभिः) = शक्तियों के हेतु से (इदं तृतीयं सवनं) = इस तृतीय सवन को भी पिबाथः = सोम का पान करनेवाला बनाओ। जीवन के प्रथम २४ वर्ष प्रातः सवन हैं, अगले ४४ वर्ष माध्यन्दिनसवन हैं और अन्तिम ४८ वर्ष तृतीय सवन हैं। प्राणसाधना द्वारा सोम का रक्षण करते हुए हम इस तृतीय सवन को भी सबल बनाएँ।
भावार्थभाषाः - भवार्थ - प्राणायाम द्वारा अश्विनी देवों का आराधन हमारे जीवन को शक्तिशाली बनाता है। इससे हम जीवन के तृतीय सवन में भी सबल बने रहते हैं।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Brilliant and generous, adorable and sociable divinities of eternal truth, Ashvins, harbingers of new knowledge, come with the ancient light and knowledge collected by forefathers and updated by you. Come fast as light with beauty and splendour of your powers, join the third session of our yajna and promote and vitalise it further.